भारत की नई एफडीआई नीति से बौखलाया चीन, कहा- उदारीकरण और सुविधा की सामान्य प्रवृत्ति के खिलाफ

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नई दिल्ली, 20 अप्रैल (हि.स.)। चीन ने आरोप लगाया है कि भारत के नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मानदंड व्यापार और निवेश की उदारीकरण और सुविधा की सामान्य प्रवृत्ति के खिलाफ जाते हैं।

भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने सोमवार को कहा है कि कुछ खास देशों से प्रत्यक्ष विदेश निवेश के लिए भारत के नए नियम कारोबार और निवेश में उदारीकरण के सामान्य चलन के विरुद्ध हैं। भारत ने पड़ोसी देशों की कंपनियों से होने वाले निवेश को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं। रोंग ने कहा कि भारत की अतिरिक्त बाधाओं को लागू करने वाली नई नीति जी-20 समूह में निवेश के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण और पारदर्शी वातावरण के लिए बनी आम सहमति के भी खिलाफ है।

भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने 17 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि निवेश के नियमों में बदलाव किए गए हैं और इसका उद्देश्य मजबूरी का फ़ायदा उठाकर किसी कंपनी को टेकओवर करने से रोकने के लिए है। 18 अप्रैल को सरकार ने फ़ैसला लिया कि पड़ोसी देशों की कोई कंपनी भारतीय कंपनी का टेकओवर केंद्र सरकार की मंज़ूरी के बाद ही करेगी। हालांकि इसमें चीन का कोई उल्लेख नहीं था। 

उल्लेखनीय है कि इस तरह की पाबंदी बांग्लादेश और पाकिस्तान के लिए पहले से ही थी। अब तक यह नियम चीन, भूटान, अफग़़ानिस्तान, म्यांमार और नेपाल के लिए नहीं था। सरकार के इस निर्णय से चीन जैसे देशों से आने वाले विदेशी निवेश पर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर घरेलू कंपनियों को प्रतिकूल परिस्थितियों का फायदा उठाते हुये बेहतर अवसर देखकर खरीदने की कोशिशों को रोकने के लिए यह कदम उठाया है।

 


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