किसानों को हर संभव राहत उपलब्ध कराएं राज्य सरकारें: तोमर
नई दिल्ली, 09 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों से कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण उत्पन्न संकट के दौर में खेती-किसानी के लिए हरसंभव राहत पहुंचाने पर जोर दिया।
तोमर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के कृषि मंत्रियों की बैठक में स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री राज्यों में फसल कटाई के बचे हुए काम के साथ ही उपार्जन कार्य सुचारू रूप से संपन्न कराए। इस दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने, किसानों को परेशानी नहीं होने देने, उऩ्हें कहीं दूर नहीं जाना पड़े, यह सब गंभीरता से देखा जाएं। सभी राज्य भी कंट्रोल रूम बनाकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय के कंट्रोल रूम के साथ पूरा समन्वय बनाए रखें ताकि विशेषकर, अंतरराज्यीय परिवहन की समस्या ना आएं।
तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा छूट देने का उद्देश्य यह है कि किसानों को कृषि उपज मंडियों में लाने की जरूरत नहीं पड़े और वे परेशान न हो। वेयर हाऊसों से ही कृषि उपज की बिक्री सुविधाजनक तरीके से की जा सकती है। श्री तोमर ने राज्यों के कृषि मंत्रियों का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि लॉकडाउन के प्रारंभिक दौर में सब्जी मंडियों में सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा गया था, ऐसे में राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कृषि उपज की बिक्री के दौरान भीड़ नहीं लगे और कोई अव्यवस्था नहीं हो।
उन्होंने राज्यों के अनुरोध पर 30 अप्रैल तक दलहन-तिलहन के उपार्जन की निर्धारित समय-सीमा में छूट देते हुए, यह कार्य कभी भी प्रारंभ करके 90 दिनों में पूर्ण करने को कहा है। दलहन के बीज 8 साल के बजाय 10 साल तक वाले उपयोग करने के राज्यों के आग्रह पर उन्हें यह भी छूट तत्काल दे दी गई। तोमर ने कहा कि यदि कोई किसान एफपीओ या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से होम डिलीवरी कर उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाना चाहते है तो इसमें सहायता की जाएं। बैठक के दौरान, राज्यों में उचित सुरक्षा उपायों के साथ उपज खरीद की व्यवस्थाएं करने को कहा गया।
केंद्रीय मंत्री ने कोविड-19 के चलते सभी राज्यों से कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) अधिनियम में ढील देने का अनुरोध किया, ताकि किसान अपनी उपज मंडियों के बाहर और बिना परेशानी के बेच सकें। साथ ही राज्यों से निवेदन किया है कि वे मंडी टैक्स अभी ना लें। खरीद केंद्रों पर भीड़ कम करने के लिए, मध्यप्रदेश की तरह, मंडी के रूप में घोषित करके गोदामों में खरीद केंद्र खोलने को कहा। साथ ही कहा गया कि किसानों को एमएसपी का भुगतान करने के लिए म.प्र. व राजस्थान की तर्ज पर सभी राज्य पर्याप्त “रिवाल्विंग फंड” बनाएं और वेयर हाउस रसीदें (डब्ल्यूएचआर) जनरेट करें तथा रिपोर्ट ऑनलाइन करें।
