नागपुर: समाज और राष्ट्र की सेवा में ‘समिधा’ बने स्वयंसेवक

0

नागपुर, 29 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवकर ने ‘सेवा के यज्ञकुंड में समिधा बन जलने’ का उपदेश दिया था। उनके इस उपदेश को आदेश मानकर कार्य करने वाले स्वयंसेवकोंं ने कोरोना महामारी की भयानक त्रासदी में भी समाज और राष्ट्र की सेवा का यज्ञकुंड निरंतर रूप से प्रज्वलित रखा है।
स्वयंसेवकों ने संभाली कमान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीते 95 वर्षोंं से शिक्षा, चारित्र्य, त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति का अलख जगाने का काम निरंतर रूप से कर रहा है। जब-जब देश पर संकट आया तब-तब स्वयंसेवकोंं ने कमान संभाली है। कोरोना महामारी की विभीषिका को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तथा सरकार्यवाह सुरेश उपाख्य भैय्याजी जोशी ने स्वयंसेवकोंं से सहायता करने का आह्वान किया था। नतीजतन नागपुर के लगभग एक हजार से अधिक स्वयंसेवक जनसेवा में सक्रिय हो गए। इसके चलते झुग्गियों में जीवन व्यतीत करने वाले लोग इस मुश्किल घड़ी में भी राहत का अनुभव कर रहे हैंं।
सेवा कार्य के चार अहम बिन्दु
सरसंघचालक और सरकार्यवाह का आदेश प्राप्त होते ही नागपुर में स्वयंसेवकोंं ने सेवाकार्य की कमान संभाल ली। नागपुर महानगर कार्यवाह अरविन्द कुकडे ने बताया कि सेवा कार्य के लिए 4 अहम बिंदुओंं पर ध्यान दिया जा रहा है। नागपुर की 380 झुग्गियों में कोरोना वायरस का प्रसार रोकने, इन बस्तियोंं में रहने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करने, सभी की जरूरतेंं पूरी करने और स्वास्थ्य सुविधाएंं जारी रखने में स्वयंसेवक जुटे हैं।
झुग्गियों में भोजन वितरण
नागपुर शहर में 12 नगर तथा 38 सेवा बस्तियांं है। इनमें से हर सेवा बस्ती के तहत 20 झुग्गियां आती हैंं। स्वयंसेवकोंं ने राहत सामग्री और सहायता संकलन के लिए केन्द्र बनाए हैंं। इन केंन्द्रोंं के जरिए जरूरतमंदोंं तक भोजन तथा जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। कुकडे ने बताया कि इन केन्द्रोंं के जरिए हर रोज पांंच सौ से छह सौ फूड पैकेट का वितरण होता है। इस कार्य में लगभग 500 स्वयंसेवक जुटे हुए हैंं। स्थानीय जलाराम बाप्पा मंदिर तथा स्वामीनारायण मंदिर परिसर में स्थित रसोई में खाना बनाकर 30 मिनट के भीतर जरूरतमंदोंं को मुहैया कराया जाता है।
स्वास्थ्य सेवा में सहयोग
थैलीसीमिया और ब्लड कैन्सर के मरीजों को निरंतर रूप से खून की आवश्यकता पड़ती है लेकिन लॉकडाउन के चलते रक्तदान थम गया है। नतीजतन नागपुर के ब्लड बैंकोंं में खून की कमी महसूस हो रही है। इस संकट को देखते हुए स्वयंसेवकोंं ने ‘यूथ फॉर सेवा’ नामक संस्था के सहयोग से शहर में 5 जोन्स बनाकर रक्तदान का काम प्रारंभ कर दिया है। इन जोन्स में फोन पर यदि खून की मांग होती है तो स्वयंसेवक तुरंत रक्तदान करने पहुंच जाते हैंं। इसके अलावा फेस मास्क, सेनेटाइजर, साबुन जैसी चीजें राशन की दुकानोंं के जरिए सप्लाई की जा रही हैंं। शहर के आईजीएमसी (मेयो) और जीएमसी (मेडिकल) अस्पतालोंं में मरीज तथा उनके रिश्तेदारोंं के लिए समर्पण संस्था के सहयोग से भोजन का प्रबंध करवाया गया है।
बुजुर्ग दम्पतियोंं को सहयोग
जिन बुजुर्ग दम्पतियोंं के बेटे-बेटियांं विदेशोंं में रहते हैंं और महामारी के चलते वह अपने बूढे माता-पिता की सुध नहींं ले सकते, उन बुजुर्ग दम्पतियोंं को भी स्वयंसेवक मदद मुहैया करा रहे हैंं। इन बुजुर्गोंं के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। जिस पर कॉल करने के बाद स्वयंसेवक इन बुजुर्गोंं के घर पहुंच कर उनकी सहायता कर रहे हैंं।

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *