‘सूरमा नहीं विचलित होते… कांटों में राह बनाते हैं…’

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युवा मामलों के मंत्रालय ने प्रेषित की रश्मिरथी की पंक्तियांलोगों से घरों के रहने की दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाने की अपील



नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाव को लेकर सरकार लगातार लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने की अपील कर रही है। अपील का ज्यादा असर नहीं दिखने पर देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया गया। इसके बावजूद शासन-प्रशासन लोगों को बहुत जरूरी होने पर ही सावधानी और सुरक्षा उपकरणों के साथ घरों से बाहर निकलने की सलाह दे रही है।

इस बीच सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोगों को इस वायरस की गंभीरता को समझने तथा उससे बचाव को लेकर जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। ऐसे में खेल एवं युवा मंत्रालय ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना रश्मिरथी की पक्तियां अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट कर लोगों को संकल्प के साथ कोरोना से लड़ने की अपील की है।

मंत्रालय ने ट्वीट कर लिखा है, ‘#COVID19 के खिलाफ इस जंग में हम सब मिलकर अपने देश को जिताएंगे। वी कैन, वी विल.’ इसी के साथ रश्मिरथी की पंक्तियां- ‘सच है विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है। सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं विचलित होते। विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटो में राह बनाते हैं।’ भी ट्वीट की गई हैं।

युवा मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि सभी भारतीयों को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए घरों में रहना चाहिए। इस दौरान पुस्तक पढ़ना तथा योग कर खुद को फिट रखना समय का बेहतर उपयोग होगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीते मंगलवार को देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की है। देश को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर हम 21 दिन नहीं सम्भले तो देश 21 साल पीछे चला जाएगा।

 


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