लॉकडाउन और डर में खरीद से विश्व में खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका : एफएओ

0

सिंगापुर, 21 मार्च (हि.स.)। कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन और डर से ज्यादा खरीद से विश्व में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। एफएओ के एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री और कृषि विश्लेषकों ने कहा है कि प्रमुख निर्यातक देशों में मुख्य अनाजों और तिलहन की पर्याप्त आपूर्ति होने के बावजूद ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है।

270,000 से अधिक संक्रमण और 11,000 से अधिक मौत के साथ कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया को चौंका दिया है। इसकी तुलना दोनों विश्व युद्धों और 1918 के स्पेनिश फ्लू महामारी जैसी अपदा के साथ की जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के रोम मुख्यालय से उसके मुख्य अर्थशास्त्री अब्दोलरेज़ा अब्बासियन ने कहा, ” संकट पैदा करने के लिये केवल सभी बड़े व्यापारियों जैसे कि मिलर्स या सरकारों से ज्यादा खरीद करने की जरूरत है। यह आपूर्ति का मुद्दा नहीं है, लेकिन यह खाद्य सुरक्षा पर एक व्यवहारिक बदलाव है। अगर थोक खरीदार सोचते हैं कि उन्हें मई या जून में गेहूं या चावल के जहाज नहीं मिल सकते हैं, तो क्या होगा? यही कारण है कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति का संकट पैदा हो सकता है।”

सिंगापुर से लेकर अमेरिका तक दुनिया भर के उपभोक्ता हाल के दिनों में चावल और हैंड सैनिटाइज़र से लेकर टॉयलेट पेपर जैसी वस्तुओं को जमा करने के लिए सुपर बाजारों में कतारबद्ध हैं।

इस सप्ताह वैश्विक बेंचमार्क शिकागो गेहूं का वायदा 6 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। यह नौ महीनों में सबसे बड़ा साप्ताहिक लाभ है। जबकि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े निर्यातक थाईलैंड में चावल की कीमतें अगस्त 2013 के बाद सबसे अधिक हो गई हैं। फ्रांस का अनाज उद्योग फैक्ट्रियों और बंदरगाहों को चालू रखने के लिए पर्याप्त ट्रकों और कर्मचारियों को हासिल करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। पास्ता और आटे की खरीद तेजी से बढ़ने के कारण गेहूं के आयात में उछाल हुआ है।

उद्योग के प्रतिनिधियों और किसानों ने कहा कि यूरोपीय संघ के कुछ देशों द्वारा महामारी रोकने के लिये अन्य सदस्य राज्यों के साथ अपनी सीमाओं पर लगाए गए प्रतिबंध भी खाद्य आपूर्ति को बाधित कर रहे हैं।

हालांकि अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) के अनुमान के मुताबिक जून में फसल बिक्री सत्र के अंत में वैश्विक गेहूं का स्टॉक पिछले साल के  277.57 मिलियन टन से बढ़कर 287.14 मिलियन टन होने का अनुमान है। विश्व में चावल का स्टॉक एक साल पहले के 175.3 मिलियन टन की तुलना में 182.3 मिलियन टन होने का अनुमान है।

विश्लेषकों ने कहा कि भंडारण भी एक प्रमुख वैश्विक मुद्दा है। लगभग 140 मिलियन टन मकई जो अमेरिका में इथेनॉल बनाने में उपयोग किया जाता है, उसमें से कुछ अब भोजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए उसके ईंधन में उपयोग की जरूरत नहीं होगी। सबसे बड़ी चिंता सही जगह पर सही समय पर भोजन उपलब्ध कराने की है। मध्य पूर्व में तेल निर्यातक राष्ट्र शुद्ध अनाज आयातक भी हैं। इस साल कच्चे तेल के 60 प्रतिशत से अधिक के नुकसान के कारण अनाज आयात में उनको ज्यादा कठिनाई महसूस होने की संभावना है।

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *