मध्यप्रदेश में 16 महीने के बाद फिर भाजपा सरकार आने की तैयारी

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भाजपा के लिए सत्ता के सुख का रंग लेकर आई इस बार की होली



भोपाल, 10 मार्च (हि.स.)। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के बीचे इस साल की होली राजनीतिक रंग और सत्ता का सुख लेकर भी आई है। अब तक रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में इस वक्त ऐसा माहौल नजर आ रहा है कि जैसे भाजपा की वापसी सत्ता में हो गई हो।
दरअसल भाजपा के बड़े नेता बार-बार यह कहते हुए सुनाई देते थे कि वह जब चाहे तब सरकार बना लेंगे और कांग्रेस की सरकार तो अल्पमत की सरकार है, यह ज्यादा दिन नहीं रहेगी। यह तो अपने ही कर्मों से और अपने ही लोगों द्वारा किए जा रहे कार्यों से ही गिर जाएगी। वास्तव में यह आज सच होता नजर आ रहा है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में विधायकों का गणित देखें तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब अपना इस्तीफा कांग्रेस की राष्ट्रीय अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा तो उसी के साथ यह तय हो गया कि अब फिर एक बार मध्यप्रदेश में कमल खिलने जा रहा है। इसी के साथ यह देखने लायक है कि आज ही सिंधिया के पिताजी स्वर्गीय माधवराव सिंधियाजी की जयंती है और उन्होंने यह कदम उनके जन्मदिन के अवसर पर उठाया है। उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा भी है कि वह एक नई शुरुआत कर रहे हैं, इसकी पटकथा तो कांग्रेस ने उनके लिए एक साल पहले से ही लिखना शुरु कर दी गई थी।आज इतना जरूर हुआ है कि उन्होंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उधर, इस पूरे मामले को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्त कर दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जनकल्याणकारी योजनाओं को छल के साथ बंद करने की जुगत में लगी सरकार को जनता माफ नहीं करेगी। इस छलिया सरकार के पाप ही इसे एक दिन ले डूबेंगे।
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना देना नहीं है। प्रदेश में जो हालत राजनीतिक तौर पर दिखाई दे रहे हैं, यह कमलनाथ सरकार और कांग्रेस पार्टी के भीतर की अपनी कमियों का परिणाम है। हम तो पहले ही दिन से कह रहे हैं कि यह सरकार अपने ही कर्मों से गिरेगी। पिछले 16 महीनों में मध्य प्रदेश की जो दुरावस्था दिखाई दे रही है, वह कांग्रेस सरकार की देन है। इसे तो आज नहीं, कल जाना ही है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाराज होने के बाद से उनसे जुड़े विधायक एवं मंत्रियों ने बेंगलुरु का रुख किया है। उसके बाद से जैसे प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। मध्य प्रदेश में सियासी हलचल के चलते सोमवार देर रात कमलनाथ सरकार के 20 मंत्रियों ने सामूहिक तौर पर मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपने इस्तीफे सौंप दिए थे। सभी ने राज्यपाल को भी अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं जिसके बाद अब कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ कभी भी अपना  इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं।

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