हुनर हाट बना देश के अल्पसंख्यकों के जीवन में नया सवेरा

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प्रधानमंत्री की चाय की चुस्की ने अम्मी जान को दी जीने की नई राह



रांची, 09 मार्च (हि.स.)। ‘अम्मी जान की रसोई’ के कवाब-पराठा, बिरयानी और मटन कोरमा जैसे लज़ीज़ स्वाद का मज़ा फरीदाबाद की चाहरदीवारी से निकलकर हुनर हाट के ज़रिए आदिवासी बहुल झारखंड की राजधानी रांची तक पहुंच गया है।

फरीदाबाद की गली नंबर 23 में अम्मी जान की रसोई के कवाब-पराठा का जायका लोगों के बीच बहुत मशहूर था लेकिन हुनर हाट ने इसे फरीदाबाद की तंग गलियों से निकालकर देश के बड़े शहरों तक पहुंचने का अवसर प्रदान किया।  ‘अम्मी जान की रसोई’ को अब एक नया अवसर मिला है हुनर हाट से और ये मुमकिन हो पाया है प्रधानमंत्री के उस विज्ञापन से जिसमें प्रधानमंत्री इंडिया गेट वाले हुनर हाट में चाय की चुस्की लेते हुए दिख रहे थे। इस विज्ञापन ने अम्मी जान यानी सना मुराद को ज़िंदगी के एक नये अवसर का पता दे गया।

बस क्या था सना अपने पति ज़िया हैदर नकवी के साथ इंडिया गेट पहुंच गयीं और हुनर हाट के साथ जुड़ गयीं। अम्मी जान ने बताया कि 17 फरवरी को मैंने इंडिया गेट में अपना पंजीयन कराया था और एक मार्च के लिए झारखंड में स्टाल लगाने का मौक़ा मिल गया। मैं आश्चर्यचकित थी।

उन्होंने कहा कि जब मुझे अल्पसंख्यक मंत्रालय से ये जानकरी दी गयी कि एक मार्च से झारखंड की राजधानी रांची में लगने वाले हुनर हाट में आपको स्टॉल आवंटित किया गया है। ये मैसेज देख कर मैं पहले घबरा गई लेकिन फिर तय किया कि मैं रांची जाऊंगी। यहांं आने के 8 दिन बाद ही मेरी ज़िंदगी बदल गई। मुझे हुनर हाट एक ऐसा प्लेटफॉर्म मिल गया जहां से मुझे अपने हुनर को देश और दुनिया में पहुंचाने का मौका मिला और आमदनी का नया ज़रिया। उन्होंने बताया कि 8 दिनों में ही 40,000 रुपये की आमदनी हुई है जो घर की चाहरदीवारी में रात-दिन मेहनत करके सालभर में भी नहीं कमा पाती थीं।

अम्मी जान बताया कि मुझे हुनर हाट कार्यक्रम के सीएमडी शाहबाज़ भाई का बहुत सहयोग मिला। उन्होंने ही सबसे पहले मेरे कवाब-पराठा को टेस्ट किया था और उन्हें इतना पसंद आया कि मुझे यहांं आने का अवसर दिया। अम्मी जान के अनुसार हुनर हाट से उनकी ज़िंदगी मेंं बहुत बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि हुनर हाट में मेरे कवाब-पराठा का जायका लेने के बाद मुझे आज कई बड़े रेस्टोरेंट से ऑफर आने लगे हैंं। उन्होंंने कहा कि इंडियन शेफ़ के ज्यूरी सय्यद अली सहब ने भी मुझे ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि ये सब कुछ मेरी ज़िंदगी का नया अनुभव है। चाहरदीवारी के बाहर हमारे लिए इतने सारे अवसर थे, मुझे कभी पता ही नहीं चला। मैं शुक्रगुज़ार हूंं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी साहब का, जिन्होंने हुनर हाट जैसा अवसर अल्पसंख्यकों को दिया।

देश के 100 से अधिक शहरों में हुनर हाट का आयोजन

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले के मंत्रालय की ओर से देशभर के 100 से अधिक स्थानों पर हुनर हाट का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय कारीगरों की धरोहर के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग के उद्देश्य से यह आयोजन किया जाता है।

प्रधानमंत्री के चाय की चुस्की ने देश का ध्यान आकर्षित किया

दिल्ली के इंडिया गेट में लगे हुनर हाट में पीएम नरेंद्र मोदी ने चाय की चुस्की लेकर और लिट्टी चोखा खाकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था।

उस्ताद योजना यानी हुनर हाट

हुनर हाट का आयोजन केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा उस्ताद योजना के तहत किया जाता है। उस्ताद योजना का उद्देश्य भारत के अल्पसंख्यक समुदाय की परंपरागत कला तथा शिल्प की धरोहर का संरक्षण करना है। इसके लिए उनके कौशल में वृद्धि की जाती है तथा उनके उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुंचाने के लिए प्रयास किया जाता है।

हुनर हाट लाखों शिल्पकारों, कारीगरों और पारम्परिक रसोइयों को दे रहा रोज़गार

पिछले तीन साल के दौरान हुनर हाट के जरिए 2.5 लाख शिल्पकारों, कारीगरों को रोजगार मिला है। मोदी सरकार अगले पांच साल के दौरान हुनर हाट के जरिए लाखों शिल्पकारों, कारीगरों और पारंपरिक रसोइयों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी।

हुनर हाट का मकसद

हुनर हाट भारतीय धरोहर को बढ़ावा देने वाले कारीगरों व शिल्पकारों को बढ़ावा देने की योजना है। शिल्पकारों व कारीगरों को सशक्तिकरण व रोजग़ार के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध करवाना है। प्रतिभाशाली कलाकारों को यह प्लेटफॉर्म मिलता है। भारतीय कारीगरों व शिल्पकारों के विश्वसनीय ब्रांड का निर्माण होता है। मेक इन इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के उद्देश्य को पूरा करने में सहायक है हुनर हाट।

‘हुनर हाट’ का आयोजन

हुनर हाट दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, चेन्नूई, कोलकाता, बेंगलुरू, लखनऊ, अहमदाबाद, देहरादून, पटना, इंदौर, भोपाल, नागपुर, रायपुर, हैदराबाद, पुडुचेरी, चंडीगढ़, अमृतसर, जम्मू, शिमला, गोवा, कोच्चि, गुवाहाटी, रांची, भुवनेश्वर, अजमेर और अन्य स्थानों पर आयोजित किए जा रहे है और इनमें से कई स्थानों पर आयोजित हो चुके हैंं।

रांची में हुनर हाट

एक मार्च को रांची में हरमू हाउसिंग कॉलोनी के पास हरमू मैदान में हुनर हाट का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और रांची के सांसद संजय सेठ ने किया था।

देश के 22 राज्यों के उस्तादों ने दिखाया अपना हुनर

हुनर हाट में हस्तशिल्प के 125 स्टॉल लगाए गए थे। पहली बार रांची में आयोजित हुनर हाट में 100 क्राफ्ट के स्टॉल लगाए गए थे। इसमें जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के 22 राज्यों के हुनर के उस्तादों के उत्पाद उपलब्ध थे। एक ही परिसर में लोगों को गुजरात का अजरख तो हिमाचल प्रदेश की ट्राइबल ज्वेलरी लोगों को मिली। असम के बेंत व बांस, जूट उत्पाद से लेकर पश्चिम बंगाल का काथा, ढकाई सिल्क, तांत साड़ी तो वाराणसी सिल्क, लखनवी चिकनकारी के साथ पटियाला की मशहूर फूलकारी व जूती तो राजस्थान का हैंडिक्राफ्ट और हैंडलूम उत्पाद का प्रदर्शन किया गया।

बिहार का लिट्टी चोखा, बनारस की कचौड़ी, लखनऊ का नवाबी पकवान

हाट में गुजरात की थाली, अम्मी जान की रसोई, बिहार के चूल्हे से लेकर नवाबी पकवान, बनारस की कचौड़ी और हलवा, तमिल व्यंजन और पंजाबी रसोई का स्वाद लोगों ने लिया। यहां कई जगह सेल्फी प्वाइंट बनाए गए थे। परिसर में कश्मीर का शिकारा लोगों को आकर्षित कर रहा था तो हाउस बोट में बच्चे मस्ती करते नजर आए।

 


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