हाथ जोड़ नतमस्तक हुईं राजकुमारी, बुद्ध से मांगी इंडो-थाई की खुशहाली

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कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर और मुकुटबन्धन चैत्य में की विशेष पूजा



कुशीनगर, 22 फरवरी (हि.स.)। थाईलैंड की राजकुमारी चुलबोर्न ने शनिवार को कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मन्दिर में विशेष पूजा-अर्चना की। मन्दिर स्थित 5वीं सदी की बुद्ध की शयनमुद्रा वाली प्रतिमा के समक्ष पहुंचते ही वह भावविभोर हो उठीं। वह दोनों हाथ जोड़कर एक मिनट तक प्रतिमा के समक्ष नतमस्तक रहीं। उसके बाद बुद्ध प्रतिमा पर थाई राजपरिवार की तरफ से खास चीवर ओढ़ाकर भारत और थाईलैंड की उन्नति, शांति व खुशहाली की कामना की।

पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत राजकुमारी चुलबोर्न थाई वाट से शनिवार की सुबह 7.20 बजे महापरिनिर्वाण मन्दिर पहुंची। बाहर कतारबद्ध खड़े थाई राजनयिकों, थाई बौद्ध भिक्षुओं, राजपरिवार व थाई प्रशासन के अधिकारियों ने राजकुमारी की अगवानी की। स्वागत की औपचारिकता के बाद राजकुमारी को मन्दिर के भीतर ले जाया गया, जहां थाई बौद्ध भिक्षुओं ने मंत्रोच्चारण पश्चात चीवर अर्पित कराया।

बौद्ध भिक्षुओं ने प्रिंसेज को बुद्ध प्रतिमा की खूबियां बताईं। तीन अलग-अलग कोणों से शयन, चिंतन और मुस्कुराती मुद्रा में नजर आने वाली प्रतिमा की खूबियों को प्रिंसेज ने शिद्दत से महसूस किया। मन्दिर से प्रिंसेज का काफिला थाई क्लीनिक पहुंचा। वहां औपचारिक स्वागत के बाद प्रिंसेज को क्लिनिक की गतिविधियों की जानकारी दी गई। उन्होंने क्लीनिक का निरीक्षण भी किया। क्लीनिक से वह बुद्ध के शवदाह स्थल मुकुटबन्धन चैत्य (रामाभार स्तूप) पहुंची। यहां राज्य सरकार की तरफ से विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी प्रेम शंकर गुप्त और डॉ.ए.के.सिन्हा ने राजकुमारी का स्वागत किया।

स्तूप पर विशेष पूजा के बाद प्रिंसेज को पुनः थाई वाट ले जाया गया। राजकुमारी थाई वाट के रॉयल सुइट में ठहरी हैं, जहां केवल थाई प्रशासन और राजपरिवार के चुनिंदा अधिकारियों को जाने की इजाजत है।

खुश प्रिंसेज बोलीं, बहुत सुंदर है कुशीनगर :

विशेष पूजा के बाद राजकुमारी ने कहा कि वह बहुत प्रसन्नता महसूस कर रही हैं। कुशीनगर बहुत सुंदर जगह है। एक महिला थाई राजनयिक ने पत्रकारों से राजकुमारी के विचार साझा किए।

थाई दूतावास में तैनात अधिकारी ने बताया कि थाई राजपरिवार का कुशीनगर से विशेष लगाव है। राजकुमारी ने भारत में स्थित बुद्ध से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों की यात्रा की है। उन्होंने 15 फरवरी को बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थल बोधगया के महाबोधि मंदिर में विशेष पूजन किया।


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