दिल्ली के संग्राम में उत्तराखंड सरकार का इम्तिहान

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प्रवासी उत्तराखंडियों के प्रभाव वाली सीटों पर जुटे सीएम, मंत्री-दिल्ली में ताबड़तोेड़ जनसभाएं कर रहे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत 



देहरादून, 03 फरवरी (हि.स)। दिल्ली के चुनावी संग्राम में उत्तराखंड सरकार का भी इम्तिहान है। जहां एक एक सीट पर भाजपा कडे़ मुकाबले से दो चार है, वहां पर उत्तराखंडियों के प्रभाव वाली दस सीटों पर कमल खिलाने के लिए उत्तराखंड सरकार के कई मंत्री पसीना बहा रहे हैं। खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं। भाजपा संगठन ने चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले सीएम की कम से कम 30 जनसभाएं आयोजित करने का कार्यक्रम बनाया है।

करावलनगर, पड़पड़गंज, आरके पुरम जैसी तमाम सीटों पर प्रवासी उत्तराखंडियों की अच्छी खासी संख्या है। दिल्ली में सक्रिय उत्तराखंडी समाज के संगठनों का दावा है कि उत्तराखंडी वोटरों की संख्या 24 लाख से ज्यादा है। दो सीटों पर भाजपा और कांग्रेस ने उत्तराखंडी चेहरेे चुनाव मैदान में उतारे हैं। प्रवासी उत्तराखंडियों के प्रभाव वाली सीटों पर पूर्व में भाजपा अच्छा प्रदर्शन करती रही है। करावलनगर सीट को ही लें, तो उत्तराखंडी चेहरे मोहन सिंह बिष्ट को यहां से तीन बार विधानसभा में जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई है। इस बार वह फिर से चुनाव मैदान में हैं।
पड़पड़गंज सीट पर भी उत्तराखंड के सीएम और मंत्री जोर लगा रहे हैं। यहां से आम आदमी पार्टी ने अपनेे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही यहां से उत्तराखंडी चेहरे सामने किए हैं। भाजपा की कोशिश इस सीट पर बेहतर प्रदर्शन कर आप को चैंकाने की है। कितनी सफलता मिलती है, यह अलग बात है। वैसे, त्रिवेंद्र सरकार के मंत्री मदन कौशिक, सतपाल महाराज, धन सिंह रावत दिल्ली मेें कई दिनोें से चुनाव प्रचार में जुटेे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद तीरथ सिंह रावत, अजय भट्ट को भी पार्टी ने चुनाव प्रचार का जिम्मा दिया है।
दिल्ली के चुनाव भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भले ही बेहद महत्वपूर्ण हो, लेकिन उत्तराखंड सरकार के मंत्री जिस तरह से चुनाव प्रचार में ताकत झोंके हुए हैं, उसे देखते हुए उनकेे लिए यह चुनाव किसी इम्तिहान से कम नहीं है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, न सिर्फ उत्तराखंडी वोटरों के प्रभाव वाली, बल्कि दिल्ली की सभी सीटों पर भाजपा की मजबूत स्थिति है। दिल्ली की सत्ता में भाजपा का आना तय है।

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