अब एक ही पौध में आलू-टमाटर दोनों पैदा होगा, कृषि वैज्ञानिकों को मिली सफलता

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वाराणसी, 23 मार्च (हि.स.)। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान की वाराणसी इकाई के वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। पहली बार आलू के पौध पर टमाटर की पौध लगाने में वैज्ञानिकों ने सफलता हासिल की है। इसे ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार किया गया है। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. अनन्त बहादुर एवं उनकी टीम को यह सफलता मिली हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ.जगदीश सिंह ने शनिवार को बताया कि इस नई तकनीक के माध्यम से आलू की नर्सरी पौध पर टमाटर की उन्नतशील किस्में बुवाई के एक महीने के अन्दर ग्राफ्ट की जाती हैं, जिन्हे बहुत देखभाल के बाद लगभग 20 दिन बाद खेत या गमले में रोपित किया जाता है। उन्होंने बताया कि रोपाई के दो माह बाद टमाटर की तुड़ाई शुरू हो जाती है जबकि आलू की खुदाई टमाटर की पौध के सूखते समय किया जाता है। उन्होंने बताया कि संस्थान में किए गये अध्ययन से पता चला कि प्रत्येक पोमैटो पौध से लगभग 1.5 किलो टमाटर एवं 500-600 ग्राम आलू की पैदावार होती हैं। यदि इन पौधों को खेत में मेड़ बनाकर लगाया जाय तथा टमाटर को सहारा दिया जाय तो और अधिक उत्पादन होने की सम्भावना हैं।
उन्होंने बताया कि पोमैटो को शहरी आबादी में घर की बालकनी में या बड़े गमलों में आसानी से उगाया जा सकता है। ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार इस विधि को पोमैटो या टोमटाटो भी कहा जाता है। डॉ. सिंह के अनुसार ग्राफ्टिंग तकनीक के माध्यम से बैंगन की पौध पर टमाटर लगाकर जड़-जनित बीमारियों के अलावा टमाटर की पौध को अधिक जल एवं सूखा से भी बचाने की तकनीक संस्थान द्वारा विकसित की गयी है।


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