सुहागनगरी के सियासी मैदान मेंं चाचा-भतीजे की जंग

0

फिरोजाबाद, 20 मार्च (हि.स.)। ब्रज क्षेत्र की सुहागनगरी लोकसभा सीट पर लोकसभा 2019 का चुनाव सबसे ज्यादा दिलचस्प हो गया है। मंगलवार को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रत्याशियों की जारी हुई सूची में फिरोजाबाद सीट पर पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव के स्वयं प्रत्याशी बनने से अब इस सीट पर सैफई परिवार के चाचा-भतीजे सियासी मैदान में आमने सामने आ गये हैं। जीत का ताज जनता किसे पहनायेगी यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन इस सीट पर शिवपाल यादव की सीधी चुनावी जंग अपने ही भतीजे अक्षय यादव से होगी।
अक्षय यादव है वर्तमान में सांसद
फिरोजाबाद लोकसभा से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव वर्तमान में सांसद है। सुहागनगरी की सीट से सियासत में एंट्री करने वाले अक्षय यादव ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बाद भी भाजपा के प्रो. एस. पी. सिंह बघेल को पराजित किया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन वाली फिरोजाबाद सीट सपा के खाते में आयी है, ऐसे में सपा ने इस सीट पर अपने सिटिंग एमपी अक्षय यादव को ही प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस सैफई परिवार के अक्षय यादव के सामने प्रत्याशी ना उतारने की घोषण कर चुकी है।
2014 में किसे मिलने कितने वोट
सपा के अक्षय यादव – 534583
भाजपा के प्रो. एस. पी. सिंह बघेल – 420524
बसपा के ठाकुर विश्वदीप सिंह – 118909
कांग्रेस के अतुल चतुर्वेदी – 7447
अटकलों पर लगा विराम
प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव पहले ही फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने का एलान कर चुके थे लेकिन फिर भी यह कयास लगाये जा रहे थे कि शायद वह इस सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला बदल ले लेकिन मंगलवार को प्रसपा महासचिव आदित्य यादव द्वारा जारी की गई प्रसपा प्रत्याशियों की सूची ने इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। अब इस सीट पर सीधा सियासी मुकाबला शिवपाल यादव व उनके भतीजे अक्षय यादव के बीच होगा।
फिरोजाबाद सीट का इतिहास
फिरोजाबाद लोकसभा सीट का इतिहास रहा है कि यह सीट शुरूआती दौर में किसी एक पार्टी की होकर नही रही है। साल 1957 के पहले लोकसभा चुनाव में निर्दलीय नेता ब्रज राज सिंह ने यहां जीत हासिल जो लगातार दो वार सांसद रहे। साल 1967 मेंं संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, 1971 में कांग्रेस ने जीत हासिल की। 1991 में भाजपा ने खाता खोला और 7 सालों तक तक सीट पर कब्जा रहा। 1999 में सपा ने भाजपा से इस सीट को छीन लिया लेकिन 2009 के उपचुनाव में यह सीट सपा के हाथ से भी चली गयी और कांग्रेस इस सीट पर काबिज हो गयी लेकिन 2014 में सपा ने पुनः इस सीट को हासिल कर लिया।
इस बार दिलचस्प होगा मुकाबाल
2019 के लोकसभा चुनाव में चाचा-भतीजे के वर्चस्व वाली इस फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यादव, मुस्लिम और जाट मतदाताओं के वर्चस्व वाली इस सीट पर इस बारं मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है। जिसको लेकर सभी की निगाहे टिकी हुई है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *