राजद की संसदीय बोर्ड की बैठक से भी निराश हुए महागठबंधन के घटक दल

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पटना,09 मार्च (हि.स.)। राजद की संसदीय बोर्ड की बैठक से उम्मीद लगाये बैठे महागठबंधन के घटल दलों को शनिवार को भी निराशा ही हाथ लगी । महागठबंधन में सीटों का बंटवारा जल्द नहीं होने से इसके घटक दल में बेचैनी साफ नजर आ रही है। इस बैठक से रालोसपा,हम,वाम दल,लोजद सहित महागठबंधन के अन्य घटक दलों को सीट बंटवारे को लेकर जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी, वह भी धूमिल हो गयी।
महागठबंधन में दो बड़े दलों में से कांग्रेस का एक खेमा प्रदेश में राजद के साथ चुनावी तालमेल चाहता है जबकि दूसरा खेमा सभी सीटों पर कांग्रेस को चुनाव लड़ने की सलाह दे रहा है। ऐसे में आलाकमान ने संभावित सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की सूची मांगी थी। इसे लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा दिल्ली गये और पार्टी के आलाकमान से बातचीत हुई,लेकिन इसका रिजल्ट अब तक नहीं दिखा। इसका कारण कहीं न कहीं कांग्रेस में कुछ बड़े कद्दावर नेताओं का शामिल होना भी बताया जा रहा है।
आज राबड़ी आवास में लोकसभा चुनाव को लेकर राज्य और केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में भी सीटों के बंटवारे पर कोई बात नहीं बनी जबकि लोकसभा चुनाव पर राजद की यह पहली सबसे बड़ी बैठक थी। बैठक में साफ-साफ कह दिया गया कि लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशियों के चयन और समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ तालमेल व सीट बंटवारे के लिए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अधिकृत हैं। माहौल बता रहा है कि कहीं न कहीं सीट बंटवारे के लिए राजद पहले कांग्रेस की चाहत जानना चाहती है इसके बाद ही वह निर्णय लेगी क्योंकि महागठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद दोनों दल टालमटोल कर रहे हैं। इन दोनों बड़े दलों के इस रवैये से महागठबंधन के छोटे दलों में बेचैनी तो है ही निराशा भी झलकने लगी है।
राजद-कांग्रेस की ओर से वामपंथी दलों को तवज्जो नहीं दिये जाने से उनकी नो इंट्री की संभावना प्रबल हो गयी है। भाकपा, माकपा और भाकपा माले ने स्पष्ट कर दिया है कि अब गेंद राजद के पाले में है। उससे कई दौर की बातचीत हुई है लेकिन कुछ साफ नहीं है। यदि महागठबंधन से चुनावी तालमेल नहीं हुआ तो वामपंथी दल 15 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। माकपा के राज्य सचिव अवधेश कुमार का कहना है कि लोकसभा चुनाव की तिथि सामने है पर वामदलों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन गंभीर नहीं है। यदि महागठबंधन से चुनावी तालमेल नहीं तो पार्टी तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। भाकपा के सचिव सत्यनारायण सिंह ने कहा है कि यदि भाजपा को हराना है तो वाम-सेक्यूलर एलायंस जरूरी है। राजद से कई दौर की बातचीत हुई है लेकिन अभी तक कोई संकेत नहीं मिला है। वहीं लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) भी लगातार राजद सुप्रीमो लालू यादव से संपर्क करने में लगी है। लोजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव रांची में लालू यादव से मिलने वाले हैं। शायद इसके बाद लोजद को महागठबंधन में अपनी स्थिति साफ हो जाये। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी की स्थिति भी महागठंबधन में ठीक नहीं। राजग से कुछ महीने पहले अलग हुए रालोसपा अध्यक्ष ऊहापोह की स्थिति में है। महागठबंधन का सबसे पुराना घटक दल होने का राग अलाप रही हम पार्टी भी महागठबंधन में अपनी मजबूत दावेदारी कर रही है।


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