अयोध्या मामले में केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी

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नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। अयोध्या मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अविवादित जमीन से यथास्थिति का आदेश वापस लेने की मांग की है। केंद्र सरकार ने 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था और सिर्फ 2.77 एकड़ जमीन पर विवाद है। बाकी जमीन को रिलीज करने के लिए याचिका दायर की गई है।

केंद्र सरकार ने 1993 में इस जमीन का अधिग्रहण किया था। आपको बता दें कि अयोध्या मामले की सुनवाई आज होनी थी लेकिन सुनवाई करने वाली बेंच के सदस्य जस्टिस एसए बोब्डे आज उपलब्ध नहीं हैं जिसकी वजह से आज सुनवाई टल गई है।

25 जनवरी को अयोध्या मामले की सुनवाई करनेवाली 5 जजों की नई बेंच का गठन कर दिया गया था जिसके सदस्य जस्टिस एस ए बोब्डे भी हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस एसए बोब्डे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

पिछले 10 जनवरी को जस्टिस यूयू ललित ने वकील राजीव धवन की ओर से एतराज जताए जाने के बाद खुद ही बेंच से हटने की बात कही थी। धवन ने कहा था कि 1995 में जस्टिस ललित बतौर वकील यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के लिए पेश हुए थे। जस्टिस यूयू ललित के सुनवाई से हटने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई टाल दी थी।

27 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले से अयोध्या मसले पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस्माइल फारुकी का मस्जिद संबंधी जजमेंट अधिग्रहण से जुड़ा हुआ था। इसलिए इस मसले को बड़ी बेंच को नहीं भेजा जाएगा। जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला सुनाया था जो उनके और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का फैसला था। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर ने अपने फैसले में कहा कि इस इस्माईल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा जाए।


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