कुम्भ विशेष: कल्पवासियों की आस्था बड़ी, व्यवस्था छोटी

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कुम्भ नगरी (प्रयागराज), 22 जनवरी(हि.स.)। प्रयागराज में कुम्भ क्षेत्र के सेक्टर 12 और सेक्टर 13 में पंडों के तंबू तन गए हैं और उसमें कल्पवासियों का प्रवेश हो चुका है। कल्पवास करने वाले बड़ी आस्था के साथ तंबू में रहने लगे हैं, फिर भी उनको चकरप्लेट की सड़क, सुलभ शौचालय अब तक मुहैया नहीं हो सकी है।
सेक्टर 13 में तंबू डाले पंडा लालचन्द्र ने कहा कि पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक कल्पवास करने वाले प्रतिवर्ष संगम तट पर रहते हैं। इस बार कुम्भ लगने पर कल्पवासियों के परिवार के कुछ सदस्यों की संख्या बढ़ी है। परिवार के नए सदस्यों ने भी कल्पवास के प्रति अपनी श्रद्धा दिखायी है।
उन्होंने कहा कि कल्पवासी क्षेत्र में व्यवस्था हो चाहे ना हो, कल्पवास करने वाले कभी शिकायत नहीं करते हैं। यह भाव से भरा समय होता है, कल्पवासी इस समय केवल प्रभु का स्मरण करता है।
सेक्टर 12 में पंडा दशरथ राम ने कहा कि कल्पवास के क्षेत्र में टाट बिछाकर ईश्वर का भजन किया जाता है। ईश्वर ही जीवन को चलाने की व्यवस्थाएं देता है। उसी की शरण में एक माह बीतता है।
उन्होंने कहा कि कुम्भ क्षेत्र का यह हिस्सा कल्पवासियों के प्रमुख क्षेत्र है। इसमें सबसे ज्यादा कल्पवासी है। कल्पवास करने वालों का टेंट एक कतार में डाला गया है। उसके सामने दूसरी कतार है। दोनों कतार के बीच में सूखी घास पर बालू डालकर सड़क बनायी गयी है। जिस पर से दो पहिया वाहन आने जाने में परेशानी होती है।
कहा कि मुख्य मार्ग पर तो चकरप्लेट पड़ी है लेकिन छोटी सड़कों पर नहीं पड़ी है। मुख्य मार्ग के अलावा शौचालय भी अभी तक नहीं पहुंच सके है। व्यवस्थाओं की कमी है, फिर भी श्रद्धा बड़ी है। व्यवस्था के बिना भी कल्पवास पूरा किया जाता रहा है।
कौशम्बी जिले से कल्पवास करने आयी प्रतिमा और उनकी पुत्री गुड़िया ने बताया कि उनका परिवार कल्पवास के लिए आया हुआ है। महिला शौचालय की दूरी होने के कारण उनको परेशानी हो रही है। शौचालय जाने के बाद बाहर मुख्य मार्ग की ओर आना पड़ रहा है, जबकि शौचालय अत्याधुनिक व स्वच्छ है


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