वैश्विक आस्था का केन्द्र बना कुम्भ, विदेशी ले रहे दीक्षा

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कुम्भ नगरी(प्रयागराज), 22 जनवरी (हि.स.)। प्रयागराज में लगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला कुंभ भव्यता और आध्यात्म के मामले में किसी से कम नहीं है। कुंभ केवल भारतीय नहीं, बल्कि वैश्विक आस्था का केंद्र बना हुआ है। विदेशी श्रद्धालु कुंभ में केवल घूम-फिर या पूजा-पाठ ही नहीं कर रहे, बल्कि वह भारतीय संस्कृति का हिस्सा भी बन रहे हैं। इसके लिए वह बाकायदा संतों से दीक्षा भी ग्रहण करते हैं।

संगमनगरी में आयोजित कुंभ के लिए राज्य सरकार ने 192 देशों को निमंत्रण दिया था। सरकार ने दिसंबर माह में इन देशों के प्रतिनिधियों को प्रयागराज बुलाकर कुंभ की तैयारियों से भी रूबरू कराया था। यूपी सरकार ने इस बार कुंभ की वैश्विक ब्रांडिंग की है। यूपी पर्यटन के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। विदेशी पर्यटकों के मामले में यूपी का देश में तीसरा स्थान है, विदेशी पर्यटक सबसे ज्यादा ताज और आध्यात्म के लिए आते हैं। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उप्र सरकार ने पिछले दिनों लखनऊ में यूपी ट्रैवल मार्ट का भी आयोजन किया था। सरकार ने यहां विदेश टूर संचालकों के लिए वाराणसी, आगरा, मथुरा, वृंदावन, बुंदेलखंड, बुद्ध सर्किट और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों के दौरे का आयोजन भी किया था।

कुंभ में मौजूद विदेशी साध्वी लोगों के कौतूहल का विषय बनी हुई है। ये अकेली नहीं हैं, कुंभ मेले में इनके जैसी और भी कई विदेशी संत और साध्वी मौजूद हैं। ये पूरी तल्लीनता से आध्यात्म में डूबे हुए हैं। कुंभ में आए विदेशी श्रद्धालु यहां आकर स्थानीय लोगों की तरह वेशभूषा धारण कर उन्हीं की तरह पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। माना जाता है कि विदेशी पर्यटक अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी सजग रहते हैं। इसका नजारा कुंभ में भी देखा जा सकता है। कुंभ में काफी संख्या में विदेशी प्रतिदिन मिलकर योगासन करते हैं।

कुंभ मेले में कुछ विदेशी श्रद्धालु प्रकृति के संरक्षण का भी संदेश दे रहे हैं। ये सुबह-शाम संगम तट पर आरती में भी शामिल होते हैं। लोग इनके जब्जे को देखते रह जाते हैं। कुंभ में जुटे तमाम संतों के आसपास आपको विदेशी शिष्य भी नजर आ जाएंगे। विदेशी श्रद्धालु कुंभ में केवल घूमने-फिरने या पूजा-पाठ करने के साथ भारतीय संस्कृति का हिस्सा भी बन रहे हैं। इसके लिए वह बाकायदा संतों से दीक्षा भी ग्रहण करते हैं। वर्ष 2013 में आयोजित कुंभ में लगभग 1260 विदेशियों ने संतों से दीक्षा ली थी। इनमें से तकरीबन 900 विदेशी श्रद्धालु ऐसे थे, जिनकी आयु 25-30 वर्ष के बीच थी।


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