कुम्भ’ की ‘दिव्यता’ का विश्व को संदेश दे रहे ‘शंख ध्वनियां व महापर्व के गीत

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कुम्भनगर (प्रयागराज), 16 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित कुम्भ मेला अपनी ‘दिव्यता’ का संदेश पूरी दुनिया को देना शुरू कर दिया है।
मकरसंक्रांति के पहले शाही स्नान से ही यह परवान चढ़ाने लगा है। देशी-विदेशी मेहमान और श्रद्धालु इसे देखकर आह्लादित हो रहे हैं। डमरू-शंख ध्वनियां, जयकारे, महापर्व के गीत आध्यात्मिकता, आस्था, विश्वास और दिव्यता का दर्शन करवा रहे हैं तो यहां हुई व्यवस्था भव्यता को बताने के लिए काफी है।
कुम्भ मेला को देखने और अमृत घट से छलक कर धरती पर गिरी अमृत बूदों को पाने की लालसा में देशी-विदेशी मेहमानों ने डेरा जमा लिया है। 6000 से अधिक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं की बसावट वाला यह अस्थाई नगर इन्हें आकर्षित कर रहा है। वहीं श्रद्धा, आस्था और विश्वास में डूबा हिन्दू जनमानस यहां गिरे अमृत की बूदों का प्रभाव प्राप्त कर खुद को धन्य करने के जुटा है। मकर संक्रांति कर दिन हुए पहले स्नान में इसे लगभग डेढ़ करोड़ लोगों के स्नान के रूप में देखने को मिला। 1300 हेक्टेयर में फैले 94 पार्किंग में खड़े होने वाले 40 हजार से अधिक वाहन और 35 घाटों पर स्नान कर सुरक्षित लौट चुके श्रद्धालु इसकी गवाही दे रहे हैं। कुम्भ मेला क्षेत्र में अनवरत चल रहे कथा, प्रवचन और जयकारे व श्रद्धालु महिलाओं द्वारा गए जा रहे महापर्व के गीत इसकी दिव्यता को प्रदर्शित कर रहे हैं।
विश्व भी इसे देशी-विदेशी मीडिया की नजरों से देखा रहा है। विश्व के सबसे बड़े अस्थाई नगर में अब तक न सिर्फ 71 देशों में राजदूतों ने दौरा किया है बल्कि त्रिवेणी तट (गंगा, यमुना, सरस्वती नदियों के संगम स्थल) पर अपने-अपने देशों के राष्ट्रीय झंडे लगाकर इसकी भव्यता को पुष्ट किया है। यहां आने वाले 5000 से अधिक प्रवासियों को भारतीय संस्कृति के समागम का नजारा देखने को मिलेगा बल्कि 192 देशों को इसका प्रतिनिधित्व भी दिया गया है।


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