राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

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नई दिल्ली (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में डीजीपी बनने के योग्य अधिकारियों के चयन पर स्पष्टता मांगी है। कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग के सचिव को बुधवार को पेश होकर इस बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया है।

राज्य सुप्रीम कोर्ट से उस आदेश में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जिसमें डीजीपी की नियुक्ति से पहले संघ लोक सेवा आयोग से योग्य अधिकारियों की लिस्ट लेने की शर्त रखी गई थी। 12 दिसंबर,2018 को कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के डीजीपी को 31 जनवरी तक पद पर रहने की इजाज़त दे दी थी। दोनों का कार्यकाल 31 दिसंबर को खत्म हो रहा था। दोनों राज्य सरकारों ने इसकी मांग की थी।

कोर्ट ने डीजीपी की नियुक्ति से पहले योग्य अधिकारियों की लिस्ट यूपीएससी से मांगने की शर्त रखी है। कई राज्यों ने इसमें बदलाव की मांग की है। पिछले सितंबर महीने में केंद्र सरकार ने पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा का कार्यकाल तीन महीने बढ़ा दिया था। वे 30 सितंबर को रिटायर होने वाले थे। केंद्र सरकार ने हरियाणा के डीजीपी बीएस संधु का कार्यकाल भी सितंबर महीने में तीन महीने के लिए बढ़ा दिया था।

पिछले 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डीजीपी का पद रिक्त होने से तीन माह पहले राज्य सरकारें संघ लोक सेवा आयोग को वरिष्ठतम आईपीएस अफसरों की सूची भेजेंगे। राज्य सरकारें उसी अफसर को डीजीपी बनाएंगे, जिनका कार्यकाल दो साल से ज्यादा का होगा। कोर्ट ने कहा था कि इस बारे में हमारे फैसले का राज्य सरकारें दुरुपयोग कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में कहा था कि डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो साल का होगा।


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