एक-एक दाना धान खरीदने का वादा करने वाली सरकार किसानों का धान नहीं खरीद पा रहे

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अम्बिकापुर, 11 जनवरी (हि.स.)। प्रदेश में कर्ज माफी व धान का एक-एक दाना खरीदने का वादा कर सत्ता पर बैठी कांग्रेस सरकार पंजीकृत किसानों का ही धान नहीं खरीद पा रही है। धान उपार्जन केन्द्रों पर नजर डालें तो किसान टोकन के लिए चक्कर काट रहे हैं, अब खरीदी में शनिवार-रविवार को छोड़कर बमुश्किल 15 दिन का समय ही बाकी है और केन्द्रों में उठाव नहीं होने की वजह से जाम की स्थिति निर्मित हो गई है।
कैंपस से लेकर बाहर तक धान की बोरियां पड़ी हुई हैं। कुछ धान खरीदी केन्द्रों मे भारी अव्यवस्था की स्थिति उजागर हुई है। इसमें एक और जानकारी सामने आई है कि 2500 रुपए समर्थन मूल्य पर खरीदी करने वाली सरकार अभी पुराने दाम 2070 रुपए पर ही किसानों का धान खरीद रही है। इसकी वजह धान खरीदी केन्द्रों के कंप्यूटर में एनआइसी द्वारा सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं हो पाना है। सरगुजा संभाग के चार जिले सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर व कोरिया के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल पंजीकृत किसान 98 हजार 268 हैं, इसमें 54 हजार 19 किसान ही धान बेच पाए हैं। वहीं कुल खरीदी लगभग 30 लाख 789 क्विंटल हुई है, इसमें से महज 12 लाख 20 हजार क्विंटल धान का ही उठाव हो पाया है। यह स्थिति 10 जनवरी तक की है।
अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चार जिलों में धान किस तरह से जाम पड़ा हुआ है, साथ ही बड़ी संख्या में पंजीकृत किसान अभी धान बेचने का इंतजार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन में कांग्रेस के घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी व 2500 रुपए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अहम भूमिका थी। नई सरकार बनते ही धान खरीदी केन्द्रों में किसान धान बेचने के लिए उमड़ पड़े, लेकिन उन्हें खरीदी की व्यवस्था को लेकर निराशा ही हाथ लगी है। धान का उठाव नहीं हो पाने की वजह से किसानों को तीन-तीन दिन चक्कर लगाने के बाद भी टोकन भी नहीं मिल पा रहा है।
करजी धान खरीदी केन्द्र में ग्राम कंठी का एक किसान कांता प्रसाद राजवाड़े भटकते नजर आया, उसने चर्चा के दौरान बताया कि लगातार तीसरे दिन आया हूं, लेकिन टोकन नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे में धान कैसे बेच पाऊंगा, कोई उचित जवाब व आश्वासन नहीं मिल पा रहा है, यहां नहीं बिक पाया तो मजबूरी में बाहर दुकान या कोचिए को कम दाम में धान बेचना पड़ जाएगा। ऐसी स्थिति इकलौते कांता प्रसाद की नहीं है, अधिकांश केन्द्रों में किसान टोकन के लिए भटकते नजर आ रहे हैं।
दरअसल टोकन को लेकर बनाए गए सख्त नियम भी परेशान कर रहे हैं। किसान को टोकन मिलने के बाद वह संबंधित तहसीलदार व एसडीएम के पास जाएगा, अधिकारी द्वारा सत्यापन करने के बाद ही वह धान बेच सकेगा। सरकार द्वारा धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित की गई है।
इस संबंध में सरगुजा को-ऑपरेटिव बैंक के विपणन अधिकारी पीएस परिहार ने बताया कि, धान खरीदी केन्द्रों में सॉफ्टवेयर का अपडेशन नहीं हुआ है इसलिए वर्तमान में 2050 व 2070 रुपए की दर से धान खरीदी की जा रही है, जो अंतर की राशि है, वह मार्च तक किसानों के खाते में डाल दी जाएगी।
अचानक आवक बढ़ जाने की वजह से धान का उठाव तेजी से नहीं हो पा रहा है। खरीदी केन्द्रों में शीघ्र ही धान का उठाव कराने निर्देशित किया जाएगा। 


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