स्वीडन की कंपनी ने अदालत से कहा, अनिल अंबानी को जेल भेजो

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मुंबई, 05 जनवरी (हि.स.)। एरिक्सन इंडिया ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में कार्रवाई शुरू करने की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। एरिक्सन इंडिया को 550 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान करने का आदेश उच्चतम न्यायालय ने ऑरकॉम को दिया था। लेकिन उच्चतम न्यायालय के इस आदेश का कथित तौर पर पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया है। शुक्रवार को एरिक्शन की ओर से उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। एरिक्शन ने कोर्ट से यह भी अपील की है कि ऑरकॉम के मुखिया अनिल अंबानी को जेल में डालने का फरमान सुनाया जाए।
बता दें कि स्वीडन की टेलिकॉम इक्विटमेंट कंपनी एरिक्सन ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी तथा दो अन्य लोगों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना मामले को लेकर नए सिरे से कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। कंपनी ने रिलायंस के मुखिया को बकाया रकम का भुगतान करने तक सिविल जेल में हिरासत में रखने की भी मांग की है। स्वीडन की कंपनी ने अनिल अंबानी, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के चेयरमैन सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड की चेयरपर्सन छाया विरानी के देश छोड़ने पर रोक लगाने की भी गृह मंत्रालय से मांग की है।
कंपनी ने कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि रिलायंस कम्यूनिकेशन ने जान-बूझकर अदालत की अवमानना की है। 23 अक्टूबर 2018 को ही अदालत ने ऑरकॉम को बकाए रकम के भुगतान का आदेश दिया था| लेकिन अंबानी ने कोई भुगतान नहीं किया। कंपनी ने ब्याज सहित 550 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान करने तक सिविल जेल में हिरासत में रखे जाने की अपील की है। उच्चतम न्यायालय ने 23 अक्टूबर के आदेश में रिलायंस कम्युनिकेशंस को 15 दिसंबर तक बकाया भुगतान करने को कहा था। अदालत ने देरी से भुगतान किए जाने पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का भी निर्देश दिया था। एरिक्शन कंपनी ने अदालत को बताया है कि प्रतिवादी ने आदेश के अनुसार 15 दिसंबर तक या उसके बाद भी अभी तक 550 करोड़ रुपये बकाये का भुगतान नहीं किया है। यह खुले तौर पर अदालत की अवमानना है। याचिका में कहा गया कि अंबानी और अन्य दो लोगों ने कानूनी प्रक्रिया की अवहेलना की है और न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। कंपनी ने यह भी कहा कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने अपनी कई संपत्तियों की बिक्री की है, लेकिन प्राप्त राशि से उसके बकाये का भुगतान नहीं किया।


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