साल 2019 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव रहा चरम पर

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दोनों देश उस समय युद्ध के कगार पर आ खड़े हुए थे, जब पुलवामा आंतकी हमले में कई सीआरपीएफ के जवान मारे गए और उसके बाद भारत को पाकिस्तान स्थित आंतकी शिविरों पर हवाई हमला करने के लिए बाध्य होना पड़ा।



इस्लामाबाद, 22 दिसम्बर (हि.स.)। पाकिस्तान और भारत के बीच साल 2019 में तनाव चरम पर था। दोनों देश उस समय युद्ध के कगार पर आ खड़े हुए थे, जब पुलवामा आंतकी हमले में कई सीआरपीएफ के जवान मारे गए और उसके बाद भारत को पाकिस्तान स्थित आंतकी शिविरों पर हवाई हमला करने के लिए बाध्य होना पड़ा।

हालांकि, साल का अंत एक सकारात्मक घटनाक्रम से हुआ और पाकिस्तान ने सिख तीर्थयात्रियों के लिए ऐतिहासिक करतारपुर गलियारे का उद्घाटन किया। इस गलियारे के जरिए बिना वीजा के करतारपुर साहिब के दर्शन किए जा सकते हैं।

इमरान खान के अगस्त, 2018 में सत्ता में आने के बाद उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ। लेकिन इसके बाद के महीनों के दौरान बहुत कुछ ऐसा हुआ, जिससे दोनों देशों के बीच न सिर्फ शत्रुता बढ़ी, बल्कि दोनों पक्षों को युद्ध की दहलीज पर ला दिया।

इतना ही नहीं इस साल 26 फरवरी को भारत के लड़ाकू विमान ने पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश किया और बालाकोट स्थित जैश के शिविर पर बमबारी की। वर्ष 1971 के युद्ध के बाद यह पहला मौका था जब भारतीय लड़ाकू विमान ने पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश किया।

इस हवाई हमले के बाद 27 फरवरी को दोनों देशों के बीच हवाई युद्ध जारी रहा, जब पाकिस्तान के युद्धक विमान ने भारत की सीमा में प्रवेश किया। पाकिस्तान जेट को मारने के दौरान भारतीय वायु सेना का एक जेट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और भारतीय पायलट को पाकिस्तान ने घायल अवस्था में पकड़ लिया।

एक समय ऐसा लगा कि दोनों देशों की दुश्मनी अब चरम पर पहुंच चुकी है, लेकिन पाकिस्तान ने अक्लमंदी का परिचय देते हुए भारतीय पायलट को रिहा कर दिया और दोनों पक्ष युद्ध के मुहाने से आगे नहीं बढ़े, लेकिन रिश्ते खराब रहे।

लोकसभा चुनाव के दौरान खान ने अप्रैल में एक साक्षात्कार में कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी दोबारा चुनाव जीते तो दोनों देश शांति की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

मोदी को चुनाव में भारी जीत भी मिली और दोनों देश भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को बिना वीजा करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए गलियारा बनाने पर सहमत हुए। इसके लिए एक समझौते को औपचारिक रूप देने पर बातचीत शुरू हुई।

रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलनी शुरू ही हुई थी कि मोदी सरकार ने अपने चुनावी वादों के मुताबिक जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने की घोषणा कर दी ।

इसके बाद भारत-पाक संबंध फिर पटरी से उतर गए। पाकिस्तान ने भारत के साथ कूटनीतिक संबंधों को कम कर दिया और भारतीय उच्चायुक्त को निर्वासित कर दिया।

पाकिस्तान ने साथ ही भारत के साथ सभी वायु एवं भूमि संपर्क भी खत्म कर दिए और व्यापार तथा रेलवे गठजोड़ को भी खत्म कर दिया।

इस साल दोनों देशों ने पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कानूनी लड़ाई भी लड़ी। इस फैसले से हालांकि जमीनी हालात में खास अंतर नहीं आया, लेकिन भारत को राजनयिक पहुंच मिली। इससे पहले पाकिस्तान लगातार भारत को राजनयिक पहुंच से इनकार कर रहा था।

पाकिस्तान और भारत ने नवंबर में अलग-अलग अपने तरफ के गलियारे का उद्घाटन किया। हालांकि इससे उत्पन्न सद्भावना दोनों देशों के बीच विश्वास को बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाने में सफल नहीं हो सकी।साल के अंत में भारत ने विवादित नागरिकता कानून पारित किया, इससे संबंधों में तनाव और बढ़ा।

 


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