रूसी गैस पाइप लाइन को लेकर अमेरिका और जर्मनी आमने-सामने

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यह गैस पाइप लाइन यूरोपीय समुदाय के देशों से होकर जर्मनी तक जाती है।



वाशिंगटन, 21 दिसम्बर (हि.स.)। रूसी गैस पाइपलाइन को लेकर अमेरिका-जर्मनी आमने सामने आ गाए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ने शुक्रवार को यहां रूस की सार्वजनिक गैस पाइप लाइन ‘गजप्रोम’ के कार्यों में सहयोग देने वाली कंपनियों के विरुद्ध प्रतिबंध लगाए जाने की घोषणा की है। ट्रम्प ने कांग्रेस की ओर से पारित प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह गैस पाइप लाइन यूरोपीय समुदाय के देशों से होकर जर्मनी तक जाती है। वस्तुत:  इस कार्य में नोर्ड स्ट्रॉम 2 मददगार है, जो समुद्र तल के नीचे से होकर जर्मनी को  अतिरिक्त मात्रा में गैस पहुंचाती है।
अमेरिका की मान्यता है कि यह परियोजना यूरोप के लिए घातक है। ग्यारह अरब डालर की इस परियोजना को ले कर कांग्रेस में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ने ही सदन में रूस की कड़ी आलोचना करते हुए विधेयक को अनुमति दी थी। ट्रम्प प्रशासन को  लगता है कि रूसी गैस पाइप लाइन के पूरा होने पर यूरोप में अमेरिकी हितों को चोट पहुंचेगी और अमेरिकी गैस की आपूर्ति में कमी आएगी। ट्रम्प प्रशासन को यह भी लगता है कि 1225 किलो मीटर लंबी गैस लाइन से जर्मनी तो रूस का बंधक हो जाएगा।
अमेरिका के इस निर्णय का रूस और यूरोपीय समुदाय दोनों ने कड़ा विरोध किया है। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने तो यहां तक कहा था कि अमेरिका को अपनी सीमाओं में रहकर फैसले करना चाहिए। जर्मनी के विदेश मंत्री हेको मास ने कहा है कि अमेरिका को जर्मनी के आंतरिक मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

 


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