केंद्र ने हाईकोर्ट से शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन को छह महीने का वक्त मांगा

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गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में 12वीं तक शिक्षा देने की नीति बनेगी  कोर्ट ने केंद्र सरकार को जरूरी संशोधन पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया



नई दिल्ली, 09 दिसम्बर (हि.स.)। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह शिक्षा के अधिकार कानून में बदलाव कर गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में 8वीं की बजाय 12वीं कक्षा तक पढ़ाई करने की अनुमति देने की नीति तय कर चुका है। केंद्र सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून में इसके लिए जरूरी संशोधन करने के लिए हाईकोर्ट से छह महीने का वक्त देने की मांग की। उसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस संबंध में जरूरी संशोधन पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया।
एनजीओ सोशल जूरिस्ट ने याचिका की है। सोशल जूरिस्ट की तरफ से वकील अशोक अग्रवाल ने कोर्ट से मांग की कि शिक्षा के अधिकार एक्ट की धारा 12(1)(सी) का दायरा आठवीं क्लास से बढ़ाकर 12वीं क्लास तक किया जाए। याचिका में कहा गया है कि अगर ये दायरा बढ़ाया जाता है तो शिक्षा के अधिकार के तहत जो बच्चे निजी स्कूलों में मुफ्त में पढ़ रहे हैं उनकी पढ़ाई 8वीं पास करने के बाद बाधित नहीं होगी।
याचिका में कहा गया है कि आठवीं कक्षा पास करने के बाद आर्थिक रुप से कमजोर बच्चों को निजी स्कूल अपने यहां पढ़ने की अनुमति नहीं देते हैं। इससे उन बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है। उनके अभिभावक इस स्थिति में नहीं होते कि वे निजी स्कूलों का फीस भर सकें। इसलिए शिक्षा के अधिकार कानून का दायरा आठवीं से बढ़ाकर 12वीं कर दिया जाए।

 


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