युवा बंदूक की जगह कलम से लिख रहे अपना भविष्य समाज के पास बदलाव व दिशा देने की ताकत: अभयानंद

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जातीय हिंसा और नक्सल प्रभावित इलाके के दो भाई और भाई-बहन बहुराष्ट्रीय कंपनियों में करेंगे नौकरी 



गया, 08 दिसम्बर (हि.स.) बिहार में जातीय हिंसा और नक्सल प्रभावित इलाके के बच्चे बम-गोली और प्रतिबंधित संगठनों में अपना भविष्य तलाशा करते थे। ऐसे में उन्हें देर सबेर या तो मौत मिलती थी या जेल की सलाखों के पीछे की जिंदगी। बाल और महिला दस्ता प्रतिबंधित संगठनों का अभेद कवच हुआ करता था। लेकिन कथित “मुक्त क्षेत्र” के रोल मॉडल अब नक्सली कमांडर के स्थान पर आईआईटी-जेईई/आईएएम सहित उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रों ने ले लिया है। अब आईआईटी-जेईई मेन्स से सफलता की सीढ़ी चढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का प्लेसमेंट एक लाख रुपये से अधिक के पैकेज पर हो रहा है।

जातीय हिंसा का गवाह रहा है नवादा का वारसलीगंज। वारसलीगंज के दुर्गा स्थान, उत्तर बाजार के दो सहोदर भाई मुकुल आनंद और मनु विजय क्रमश आईआईटी दिल्ली और एमएनआईटी, इलाहाबाद के छात्र हैं। मुकुल आनंद का प्लेसमेंट स्वीगी कंपनी में हुआ है जबकि मनु विजय केपीआईटी कंपनी में हुआ है।
अति नक्सल प्रभावित औरंगाबाद जिले के नवीनगर के पांडेयकरमा गांव के एक छोटे से किसान बिनोद पांडेय और मानती देवी की पुत्री निधि पांडेय और हिमांशु कुमार झारखंड के रांची स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाउंड्री एंड फोर्ज टेक्नोलॉजी से बीटेक की डिग्री हासिल की है। निधि पांडेय का महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में इंडूरेंस टेक्नोलॉजी लि.मे प्लेसमेंट हुआ है। निधि के छोटे भाई हिमांशु का प्लेसमेंट फेडरल मोगल, भिवंडी, राजस्थान में हुआ है।
गया शहर के भुसंडा के बिनोद कुमार और रेणुका देवी के पुत्र मंजीत सिंह ने एनआईटी, वारांगल से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स से बीटेक कर रहा है। मंजीत सिंह अब बीटेक की डिग्री लेने के बाद एएनएसवाईएस कंपनी में 13.5 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर नौकरी करेगा। गया के बेलागंज थाना के अग्नि गांव के पत्रकार राकेश कुमार एवं रिंकू देवी के पुत्र हिमांशु कुमार एनआईटी, अगरतला से बीटेक कर रहा है। हिमांशु कुमार का प्लेसमेंट इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग कंपनी सीजीआई में 7.2 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर हो गया है।
  उपरोक्त सभी छह छात्र-छात्राएं पूर्व डीजीपी अभयानंद के मार्गदर्शन में और समाज के द्वारा, समाज के लिए 2008 से संचालित मगध सुपर 30 के हैं। जहां गुरुकुल परंपरा के तहत चयनित छात्रों को निशुल्क भोजन, आवासन और पठन-पाठन की सुविधा समाज के सहयोग से उपलब्ध कराई जाती है।
बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक अभयानंद की मानें तो हर समस्या से निजात के लिए समाज के पास शक्ति है। समाज आगे आया तो गया और आसपास के नक्सल प्रभावित इलाके के मेधावी विद्यार्थियों को सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ने का मार्ग मिल गया।
 श्री अभयानंद ने कहा कि समाज के सहयोग से संचालित मगध सुपर 30 का हर बच्चा अपने आप में एक स्टोरी है। कैसे उनके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन समाज के सहयोग से हुआ है।

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