अनधिकृत कॉलोनियों संबंधी विधेयक लोकसभा में पारित

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इन इलाकों में पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए खरीद-फरोख्त होती थी, जो कि कानूनी रूप से वैध नहीं है।



नई दिल्ली, 28 नवम्बर (हि.स.)। दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रह रहे लोगों को एक बार के लिए मालिकाना हक दिए जाने संबंधी विधयक गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया।

लोकसभा में गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कॉलोनी निवासी संपत्ति अधिकार मान्यता) विधेयक-2019 पर चर्चा की शुरुआत करते और जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों की समस्या का कभी भी स्थायी समाधान नहीं किया गया। इन इलाकों में पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए खरीद-फरोख्त होती थी, जो कि कानूनी रूप से वैध नहीं है।

केन्दीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली में इन कॉलोनियों की पिछले 11 साल से डिजिटल मैपिंग का काम अटका हुआ है। राज्य की आप सरकार अब भी इसके लिए अतिरिक्त समय की मांग कर रही थी। केंद्र सरकार ने फैसला किया कि वह दिल्ली की 797 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को एक बार में मालिकाना हक प्रदान करेगी। 31 दिसम्बर तक इन कॉलोनियों की सीमा रेखा तय करते हुए एक डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा। इसके बाद रेजिडेंट वेलफेयर से जुड़े लोगों को आपत्ति करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद एक अन्य पोर्टल पर विभिन्न दस्तावेजों के माध्यम से मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू होगी।

हरदीप पुरी ने कहा कि इन अनधिकृत कॉलोनियों में नौ प्रतिशत वन क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र की संपत्ति में आता है, जहां इस तरह का मालिकाना हक नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान 15 प्रतिशत संपत्तियों में मालिकाना हक को लेकर विवाद भी सामने आएंगे। सरकार उचित माध्यम से इन विवादों को सुलाझा लेगी। पुरी ने कहा कि दिल्ली सरकार के इस विषय को लंबा खींचने के कारण केन्द्र ने 8-9 महीने पहले इस संबंध में निर्णायक कार्य करने की योजना बनाई।

चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि विधेयक को दूरदर्शिता नहीं बल्कि चुनाव दृष्टि के चलते लाया गया है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान दक्षिणी दिल्ली से सांसद रमेश बिधूड़ी ने पिछली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकार पर दिल्लीवासियों को झूठे सपने दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने करीब 4 साल तक डिजिटल मैपिंग का काम तक पूरा नहीं किया।

केंद्र ने दो बार खत लिखकर इस पर स्पष्टीकरण मांगा था, जिस पर केजरीवाल ने और समय दिए जाने की मांग की। द्रमुक नेता दयानिधि मारन ने कहा कि सरकार के पास अगर कोई जादू की छड़ी थी तो उसने इसका पहले प्रयोग क्यों नहीं किया। वहीं पॉश कॉलोनियों को भी मालिकाना हक दिया जाना चाहिए।

 


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