पाकिस्तान की अमरकोट रियासत का राजवंश अयोध्या में राम मंदिर के लिए देगा छह करोड़

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राणा हमीर सिंह की पुत्री अपराजिता का विवाह उत्तर प्रदेश के एटा जनपद की पूर्व रियासत अवागढ़ के युवराज तथा आगरा के राजा बलवंत सिंह कालेज की प्रबन्ध समिति के सचिव युवराज अम्बरीष पाल सिंह से वर्ष 2004 में हुआ है।



एटा, 28 नवम्बर (हि.स.)। सर्वोच्च न्यायालय से अयोध्या में राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के बाद भारत ही नहीं अन्य देशों के रामभक्तों में भी प्रसन्नता है। विदेशों में बसे राम भक्त भी अपने आराध्य के अयोध्या में बनने वाले भव्य मंदिर के लिए अपना योगदान देने के लिए आगे आ रहे हैं। पाकिस्तान की ऐतिहासिक हिन्दू रियासत अमरकोट के राणा हमीर सिंह ने अयोध्या में प्रस्तावित भव्य राम मंदिर के लिए 06 करोड़ की राशि दान में देने की घोषणा की है।
इस बारे में जब राणा से संपर्क करने की कोशिश की तो वार्ता नहीं हो सकी किन्तु राणा हमीर सिंह की भारत में विवाहित पुत्री राजकुमारी अपराजिता व उनके दामाद युवराज अम्बरीष पाल सिंह से मुलाक़ात हुई। राणा हमीर सिंह की पुत्री अपराजिता का विवाह उत्तर प्रदेश के एटा जनपद की पूर्व रियासत अवागढ़ के युवराज तथा आगरा के राजा बलवंत सिंह कालेज की प्रबन्ध समिति के सचिव युवराज अम्बरीष पाल सिंह से वर्ष 2004 में हुआ है। बातचीत में राणा के पुत्री और दामाद ने बताया कि उन्हें भी इस तथ्य की जानकारी राणा से सीधी बातचीत के बजाय सोशल मीडिया के जरिये ही हुई है। किन्तु दोनों आश्वस्त थे कि सोढ़ा राजवंश के वर्तमान अधिपति राणा हमीर सिंह ने यदि अयोध्या के भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए ऐसी कोई घोषणा की है तो यह उनके चरित्र के अनुरूप ही है।
युवराज अम्बरीष पाल सिंह व युवरानी अपराजिता का कहना है कि पाकिस्तान के लगभग 20 हजार वर्ग मील विस्तृत थाट भू-भाग के स्वामी राणा हमीर सिंह पाकिस्तान की प्रमुख हस्ती हैं। पाकिस्तान जैसे देश में भी राणा हमीर सिंह के वंश का यह योगदान उल्लेखनीय है कि राणा के स्वामित्ववाले थाट भूभाग में कभी भी एक भी गोहत्या नहीं हुई है। युवरानी अपराजिता के अनुसार उनका परिवार पाकिस्तान की राजनीति में सदैव प्रभावी रहा है। उनके भाई राजकुमार कर्णी सिंह पाकिस्तान के इस क्षेत्र की जिला पंचायत के उपाध्यक्ष हैं। उनके बाबा राणा चंद्र सिंह पाक सरकार में मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा उनके ही वंश के राणा भगवान सिंह पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे हैं।
इस अमरकोट रियासत का एक ऐतिहासिक महत्व भी रहा है। शेरशाह सूरी से पराजित हुमायूं भारत से पलायन करते समय अपनी पत्नी को अमरकोट के शासक के संरक्षण में छोड़ गया था तथा यहीं मुगल बादशाह अकबर का जन्म हुआ था।

 


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