लखनऊ मेट्रो ट्रेन के पहियों से पैदा हो रही बिजली, 40 प्रतिशत की बचत

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इस तकनीक से कानपुर, आगरा मेट्रो में भी बिजली पैदा करके बचत​ की जाएगी



लखनऊ, 26 नवम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) राजधानी के उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर के 23 किलोमीटर रूट पर ट्रेन के पहियों से उत्पन्न (री जनरेट) बिजली से चालीस प्रतिशत की बचत कर रहा है।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने मंगलवार को बताया कि उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर के 23 किलोमीटर रूट पर मेट्रो के पहियों से बिजली उपन्न करने की इस तकनीक से कानपुर, आगरा मेट्रो में भी बिजली की बचत​ की जाएगी। इसके लिए यूपीएमआरसी ने खाका तैयार कर लिया है। उन्होंने बताया कि मेट्रो के पहियों से फिर से उत्पन्न  बिजली से  लाखों रुपये की बिजली की बचत आसानी से हो सकती है। यह बचत यात्री सुविधाओं पर ज्यादा खर्च होने और कमाई कम होने पर मददगार साबित होगी।
प्रबंध निदेशक ने बताया कि लखनऊ मेट्रो ने डिपो में एक एमवी का ‘सोलर रूफ टॉप’ लगा रखा है। इसी तरह मेट्रो ने अपने उपकेंद्रों व प्रशासनिक कार्यालय में सोलर पैनल लगा रखे हैं, जो बिजली की बचत कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि लखनऊ मेट्रो रेलवे की तर्ज पर बिजली प्रति यूनिट 6.50 रुपये के हिसाब से खरीदता है। लखनऊ मेट्रो एक ट्रेन से प्रतिदिन 14,300 रुपये की बिजली बचा रहा है। प्रतिदिन 18 मेट्रो ट्रेन चलती हैंं। इस हिसाब से करीब 2,57,400 रुपये की बिजली नियमित रूप से बचत की जा रही है।

 


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