उप्र विधि आयोग ने की धर्मांतरण रोकने को कानून बनाने की सिफारिश

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आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति एएन मित्तल ने मुख्यमंत्री योगी को सौंपी रिपोर्ट



लखनऊ, 21 नवम्बर (हि.स.)। सूबे में धर्मांतरण रोकने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने कानून बनाने की सिफारिश की है। आयोग ने इस सम्बन्ध में एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें धर्मांतरण जैसे बेहद गम्भीर विषय पर कानून बनाकर इस पर रोक लगाने की पैरवी की गई है।
उप्र राज्य विधि आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति आदित्यनाथ मित्तल और सचिव सपना त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘धर्म की स्वतंत्रता (विधेयक के मसौदे सहित) उत्तर प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2019’  रिपोर्ट सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर जबरन धर्मांतरण की बात कही गई है। इसमें लव जेहाद को भी धर्म परिवर्तन की बड़ी वजह बताया गया है।आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश में हिंदुओं और विशेष रूप से अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को लालच देकर धर्मांतरण कराया जाता है। पहचान छिपाकर और लालच देकर भी धर्म परिवर्तन कराने के मामले सामने आये हैं। इसलिए इस पर रोकथाम के लिए प्रभावी कानून बनाया जाना बेहद जरूरी है।
आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति आदित्यनाथ मित्तल के मुताबिक भारतीय संविधान ने धर्म का प्रयोग करने की स्वतंत्रता दी है लेकिन कुछ एजेंसियां इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रही हैं। वे लोगों को शादी, बेहतर नौकरी और जीवन शैली के बहाने धर्म परिवर्तन करने का लालच देते हैं। देश के 10 राज्यों में धर्मांतरण का कानून पहले से ही लागू है लेकिन हमारे पास इस तरह के धर्मांतरण को रोकने के लिए कोई मौजूदा प्रावधान नहीं है।इसलिए हमने धार्मिक धर्मांतरण रोकने के लिए नए कानून की सिफारिश की है।
उप्र राज्य विधि आयोग की ये रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने से पहले स्वयं धर्मांतरण पर कानून बनाने के पक्षधर थे। वह लव जेहाद को भी धर्म परिवर्तन की बड़ी वजह बताते रहे हैं।देश के कई राज्यों में इस सम्बन्ध में पहले से ही कानून है। इसलिए अब माना जा रहा है कि राज्य वि​धि आयोग की इस सिफारिश पर योगी आदित्यनाथ सरकार भी इस सम्बन्ध में उचित निर्णय ले सकती है।

 


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