कैबिनेट ने बदले लाइसेंस के नियम, अब पेट्रोल पंप खोलना हुआ आसान

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अब नॉन-ऑयल कंपनियां भी पेट्रोल पंप खोल सकेंगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले से इसमें प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ इस सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और और निवेश बढ़ेगा।



नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (हि.स.)। सरकार ने फ्यूल रिटेल पॉलिसी (पेट्रोल पंप खोलने के नियम) में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में फ्यूल रिटेल पॉलिसी में लाइसेंस देने के नियमों में बदलाव किए गए हैं। इसके अनुसार अब नॉन-ऑयल कंपनियां भी पेट्रोल पंप खोल सकेंगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले से इसमें प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ इस सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और और निवेश बढ़ेगा।
ग्रामीण इलाके में खोलने होंगे 5 फीसदी आउटलेट
कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (सीसीईए) की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने पत्रकार वार्ता में बताया कि पेट्रोल पंप खोलने के नियमों में बदलाव किए गए हैं। अब इस बदलाव के बाद यह जरूरी नहीं रह गया है कि सिर्फ ऑयल रिफाइनिंग कंपनियां ही पेट्रोल पंप खोल सकती हैं।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद संशोधित नियमों के तहत अब फ्यूल रिटेल आउटलेट खोलने के लिए कोई भी कंपनी अप्लाई कर सकती है। इसके शर्त के मुताबिक उस कंपनी का टर्नओवर 250 करोड़ रुपये से कम नहीं होना चाहिए। साथ ही कंपनी को तीन करोड़ रुपये बतौर बैंक गारंटी देने होंगे। इसके अलावा संशोधित नियमों के मुताबिक कंपनियों को पांच फीसदी आउटलेट ग्रामीण इलाकों में खोलना होगा। सरकार के फैसले के बाद गांवों में बड़ी संख्या में पेट्रोल पंप खोले जाएंगे।
वहीं, संशोधित नियम के तहत कंपनी को ग्रामीण इलाकों में पांच फीसदी आउटलेट खोलने का लक्ष्य मंजूरी के दो साल के अंदर पूरा करना है। यदि वो ऐसा नहीं करती हैं, तो कंपनी से दो करोड़ की राशि वसूली जाएगी। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद और हरदीप सिंह पुरी ने दी।

 


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