जेकेएलएफ सरगना यासीन मलिक पर वायुसेना अधिकारियों की हत्या करने का मुकदमा शुरू

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मलिक पर 25 जनवरी,1990 में वायुसेना अड्डे के नजदीक आतंकी हमला कर वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या का आरोप है।



नई दिल्ली/जम्मू, 23 अक्टूबर (हि.स.)। अलगाववादी संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के सरगना यासीन मलिक की नई दिल्ली के तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बुधवार को जम्मू के टाडा न्यायालय में पेशी हुई। मलिक पर 25 जनवरी,1990 में वायुसेना अड्डे के नजदीक आतंकी हमला कर वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या का आरोप है। इस हमले में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित वायुसेना के चार जवान मारे गए थे तथा 22 अन्य घायल हुए थे।

आतंकवाद और विध्वंसकारी गतिविधियां (टाडा)(निवारण) के न्यायाधीश ने यासीन मलिक को भारतीय दंड संहिता की धारा-302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज आरोपों की जानकारी दी। यासीन मलिक पर टाडा कानून की धारा भी लगाई गई है। आरोप सुनाए जाते समय यासीन मलिक चुप रहा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार यासीन मलिक ने एक आतंकी दस्ते की अगुवाई करते हुए श्रीनगर के रावलपुरा क्षेत्र में वायुसेना अड्डे के पास सैनिकों पर गोलीबारी की थी। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने वर्ष 1990 में ही इस वारदात के सिलसिले में अभियोग पत्र दाखिल किया था। बाद में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने इस मुकदमें की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था तभी यह मामला ठंडे बस्ते में था। इस वर्ष उच्च न्यायालय ने मुकदमें पर लगी रोक को हटा लिया था, जिसके बाद आदलती कार्यवाही शुरू हो पाई। इस दुस्साहसी हमले के संबंध में अदालत के समक्ष यासीन मलिक पहली बार पेश हुआ। मलिक इन दिनों तिहाड़ जेल में धन शोधन से जुड़े एक मामले में बंद है।

जम्मू की टाडा अदालत ने सुनवाई की अगली तीथि पांच नवंबर तय की है। अदालत ने कहा है कि श्रीनगर जेल में बंद एक अन्य अभियुक्त शौकत बक्शी को अगली सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किया जाए। सीबीआई के अभियोजक के अनुसार जम्मू कश्मीर के केन्द्र शासित प्रदेश बनने से इस मुकदमे की कार्रवाई तेजी से चल सकेगी। अभियुक्तों के वकील कार्रवाई में बाधा नहीं डाल सकेंगे।

 


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