कैदियों की रिहाई के लिए सेंटेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक हर तीन महीने में करे दिल्ली सरकार : हाईकोर्ट

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सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पिछले एक साल में एसआरबी की एक ही बैठक हुई है। इस पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वो दिल्ली जेल कानून के मुताबिक बैठक करें।



नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वो कैदियों को समय से पहले रिहा करने पर फैसला करनेवाले सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) की बैठक हर तीन महीने में करे। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश जारी किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पिछले एक साल में एसआरबी की एक ही बैठक हुई है। इस पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वो दिल्ली जेल कानून के मुताबिक बैठक करें।
याचिका वकील अमित साहनी ने दायर की थी। याचिका में सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) के फैसलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की गई थी। साहनी ने ये याचिका तब दायर की थी जब उन्होंने 23 नवम्बर 2018 को तिहाड़ जेल में सिकंदर नाम के कैदी की मौत की खबर के बारे में पढ़ी। सिकंदर 28 साल जेल में काट चुका था और वो रिहा होने का इंतजार कर रहा था। याचिका में कहा गया था कि कुछ मामलों में एसआरबी वैसे कैदियों की रिहाई की सिफारिश करती है जो एसआरबी के 16 जुलाई 2018 के आदेश के मुताबिक नहीं होते हैं। कई बार एसआरबी के सदस्य पुलिस रिपोर्ट पर मनमाने तरीके से फैसला करते हैं।
याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार को 26 नवम्बर 2018 को इस बाबत बताया भी था। उन्होंने दिल्ली सरकार को कई सुझाव दिए थे जिसमें ये सुनिश्चित करने को कहा गया था कि उम्रकैद की सजा पाया व्यक्ति 25 सालों से ज्यादा जेल में नहीं रहे। उन्होंने सुझाव दिया था समय से पहले रिहा होनेवाले कैदियों को एक नंबर अलॉट करना चाहिए जिसमें कैदी के नाम के पहले और अंतिम शब्द को छिपाना होगा। इससे कैदी के बारे में फैसला करते वक्त उसकी जाति या धर्म आड़े नहीं आएगी। याचिकाकर्ता ने अपने सुझाव में कहा था कि कैदी को कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार भी मिलना चाहिए। एसआरबी की बैठकों की वीडियोग्राफी होनी चाहिए और पुलिस रिपोर्ट, जेल की रिपोर्ट, सामाजिक कल्याण विभाग की रिपोर्ट और दूसरे दस्तावेज उप-राज्यपाल के पास भेजे जाने चाहिए ताकि निष्पक्ष फैसला हो सके।

 


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