740 करोड़ की धोखाधड़ी में आरोपित फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह गिरफ्तार

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इसके साथ ही शिविंदर सिंह के भाई मलविंदर सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी हो गया है।



नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (हि.स.)। देश की जानी मानी दवा कंपनी रैनबैक्सी व सबसे बड़ी कॉर्पोरेट अस्पताल चेन फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह समेत चार लोगों को 740 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गुरुवार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के यह बड़ी कार्रवाई रेलीगेयर फिनवेस्ट के वरिष्ठ प्रबंधक  की शिकायत पर हुई है। इसके साथ ही शिविंदर सिंह के भाई मलविंदर सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी हो गया है।
डीसीपी ओपी मिश्रा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साउथ एक्सटेंशन पार्ट टू स्थित सी ब्लॉक निवासी 44 वर्षीय शिविंद्र मोहन सिंह, फतेहपुर बेरी के इनायत फार्म निवासी 58 वर्षीय सुनील गोधवानी, गुरुग्राम के सेक्टर 50 निवासी 48 वर्षीय कवि अरोड़ा और नोएडा सेक्टर 104 निवासी 51 वर्षीय अनिल सक्सेना के तौर पर हुई है।
गिरफ्तार तीन लोगों में रेलिगेयर के पूर्व सीईओ और प्रबंध निदेशक सुनील गोधवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना शामिल हैं। इन सभी लोगों पर 740 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का आरोप लगाया था।
रेलिगेयर के सीनियर मैनेजर मनप्रीत सिंह सूरी ने शिकायत की थी कि कंपनी और उसकी सहायक कंपनी रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड से धोखाधड़ी की गई और सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी कई फाइनैंशल ट्रांजैक्शंस के जरिए की गई। रेलिगेयर ने शिकायत में कहा है कि सिंह ब्रदर्स फरवरी 2018 तक आरईएल के प्रमोटर थे और बतौर प्रमोटर आरएफएल के मैनेजमेंट पर उनका सबसे ज्यादा कंट्रोल था, क्योंकि सब्सिडियरी कंपनी थी। आरोप है कि शिविंद्र मोहन सिंह रेलीगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड कंपनी में 85 फीसदी शेयर होल्डर थे।
इससे पहले अगस्त में ईडी ने सिंह बधुओं, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन व सीएमडी सुनिल गोधवानी, आरईएल के कार्यकारी अधिकारी एन के घोषाल, हेमंत ढींगरा से जुड़े सात ठिकानों पर छापेमारी की गई। वहीं, पिछले साल दिसम्बर में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मनी लॉंड्रिग की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। सिंह बंधुओं ने अपनी दवा कंपनी रैनबैक्सी को जापान की एक दवा निर्माता कंपनी के हाथों 4.6 बिलियन डॉलर में बेच दी थी।

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