दशहरा उत्सव : मैसूरु पैलेस में परम्परागत रूप से मनाई गई ‘आयुध पूजा’

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विजयदशमी के दिन इस उत्सव का समापन जम्बो सवारी के साथ होता है जो स्वर्णिम होदा में रखी जाने वाली देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति के साथ सुशोभित हाथियों का जुलूस विभिन्न झांकी और सांस्कृतिक समूहों के प्रदर्शन के साथ निकलता है।



मैसूरु, 07 अक्टूबर (हि.स.) । सोमवार को मैसूरु पैलेस में परम्परागत रुप से ‘आयुध पूजा’ मनाई गई। पैलेस के शाही शस्त्रागार में महाराजा यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार द्वारा पारंपरिक उत्साह के साथ आयुध पूजा पर शस्त्रों की पूजा की गई। मैसूरु महल में नवरात्रि समारोह का आगाज 29 सितंबर को यदुवीर वाडियार ने शुरू किया जो मंगलवार को समाप्त होगा। इस दिन विजयदशमी मनाई जाएगी, जिसमें भव्य जुलूस निकाला जायेगा। उत्सव के लिए मैसूरु पैलेस और शहर के कई हिस्सों को सजाया गया है।
विजयदशमी के दिन इस उत्सव का समापन जम्बो सवारी के साथ होता है जो स्वर्णिम होदा में रखी जाने वाली देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति के साथ सुशोभित हाथियों का जुलूस विभिन्न झांकी और सांस्कृतिक समूहों के प्रदर्शन के साथ निकलता है।
उल्लेखनीय है कि विजयनगर साम्राज्य के शासकों द्वारा दशहरा मनाया जाता था और यह परंपरा वाडियार को विरासत में मिली थी।
बता दें कि दिसंबर 2013 में मैसूर के राजा श्रीकंठदत्त वडियार का देहांत हो गया था। कोई औलाद नहीं होने के कारण उनकी पत्नी प्रमोदा देवी ने यदुवीर को गोद लिया था। उत्तराधिकारी बनने के बाद यदुवीर का नाम बदलकर यदुवीर कृष्णदत्ता चामराज वडियार रखा गया था।

 


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