अमेरिका ने इमरान से पूछा, चीन में मुसलमानों की दुर्दशा पर क्यों बंद है जुबान

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इमरान द्वारा मोदी सरकार की तुलना जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर के शासन से करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी के हित में नहीं है।



न्यूयॉर्क, 27 सितम्बर (हि.स.)। अमेरिका ने कश्मीर के लोगों के बारे में घड़ियाली आंसू बहाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से पूछा है कि चीन में मुसलमानों की दुर्दशा पर उनकी जुबान बंद क्यों है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशिया मामलों की मंत्री ऐलिस वेल्स ने कश्मीर के सम्बन्ध में इमरान खान के प्रलाप पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्हें भारत के खिलाफ भड़काने वाली भाषा का इस्तेमाल करने से बाज आना चाहिए। उन्होंने इमरान द्वारा मोदी सरकार की तुलना जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर के शासन से करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी के हित में नहीं है।

वेल्स ने इमरान से पूछा कि वह चीन के शिनजिआंग प्रांत में उइगर मुसलमानों की दुर्दशा पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिनजिआंग में करीब दस लाख उइगर मुसलमानों को चीन सरकार ने यातना शिविरों में रखा हुआ है। इन मुसलमानों की दशा के बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को कोई चिंता क्यों नहीं है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के एक थिंक टैंक “कौंसिल फॉर फॉरेन रिलेशन्स” के संवाद में इमरान खान से उइगर मुसलमानों की दुर्दशा पर सवाल पूछा गया था जिस पर उन्होंने कहा कि चीन उनके देश का दोस्त है। चीन के बारे में वह सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोलेंगे। एक अन्य अवसर पर इमरान ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया था कि उन्हें उइगर मुसलमानों की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

अमेरिकी मंत्री ने भारत को सलाह दी कि जम्मू कश्मीर में प्रतिबंधों को समाप्त कर राजनीतिक प्रक्रिया शुरू की जाए। राज्य में जल्द चुनाव कराए जाएं।

 


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