हाउडी मोदी : जब मंच पर टूट गयी औपचारिकता की दीवारें

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आतंकवाद पर नाम लिए बगैर पाकिस्तान पर जमकर बरसे मोदी- भारत और अमेरिका के रिश्ते लोकतंत्र की बुनियाद पर खड़े हैं: ट्रंप



नई दिल्ली, 23 सितम्बर (हि.स.)। इतिहास में ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं आता। अमेरिका की धरती, भारतीयों का आयोजन। आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान का, मेहमान बनकर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। चर्चा सरगर्म थी कि आयोजन को पहले कौन संबोधित करेंगे- मोदी या ट्रंप?
तमाम दिग्गज जानकारों के लिए भी यह मुश्किल सवाल था। ऐसे आयोजनों के लिए कोई निर्धारित प्रोटोकॉल का भी हवाला देना मुश्किल था क्योंकि ऐसी परिस्थिति कब कहां बनी थी, किसी को याद नहीं। सवाल था कि मोदी पहले बोले तो अपने अलहदा अंदाज के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप उतनी देर तक आयोजन में बने रहेंगे? चंद देर बाद ही इस पहेली को सुलझ जाना था। बल्कि यह भी देखने की उत्सुकता थी कि इसका समाधान किस तरह निकलता है?
सवाल मुश्किल था लेकिन मोदी मैनेजमेंट ने बड़ी सहूलियत से इसे मुमकिन कर दिखाया। ट्रंप के आयोजन स्थल पर पहुंचने के साथ ही भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत किया। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ट्रंप की मुलाकात। दोनों साथ-साथ मंच पर आए। दोनों ने दर्शकों का अभिवादन स्वीकारते हुए हाथ हिलाया। ट्रंप खड़े थे और कमान संभाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। मोदी ने ट्रंप का तआर्रुफ यह कहते हुए कराया कि- इनके परिचय की जरूरत नहीं। ट्रंप के संबंध में कुछ देर बोलने के बाद उन्होंने ट्रंप को बोलने के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप का पूरा संबोधन सामने बैठकर सुना और जब नरेंद्र मोदी बोलने आए तो ट्रंप ने उनका संबोधन भी पूरा सुना।

 


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