जमीयत ने कहा- कश्मीरी मुसलमानों का भविष्य भारत के साथ

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प्रस्ताव में कहा गया कि कोई भी अलगाववादी आंदोलन न केवल देश बल्कि कश्‍मीर और वहां के लोगों के लिए भी नुकसानदेह है।



नई दिल्ली, 12 सितम्बर (हि.स.)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और सभी कश्मीरी हमारे भाई हैं।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गुरुवार को आईटीओ स्थित मुख्यालय में हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा गया कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। प्रस्ताव में कहा गया कि कोई भी अलगाववादी आंदोलन न केवल देश बल्कि कश्‍मीर और वहां के लोगों के लिए भी नुकसानदेह है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि संगठन का मानना है कि यह हमारा नैतिक और राष्ट्रीय दायित्व है कि कश्मीर के लोगों के लोकतांत्रिक और मानवीय अधिकारों की रक्षा की जाए। साथ ही प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि यह हमारा दृढ़ विश्वास है कि भारत के साथ एकजुट होकर रहने में कश्मीरी लोगों का कल्याण निहित है क्योंकि पड़ोसी देश और दुश्मन ताकतें कश्मीर को तबाह करने में लगी हैं।

प्रस्ताव में पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके बयान की भी निंदा की गई। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद से इमरान खान ने असम में जारी हुए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर टिप्पणी करते हुए कहा कि था ऐसा मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जमीयत के महासचिव मौलाना महमूद मदनी के कहा कि कश्मीर हमारा था, हमारा है, हमारा ही रहेगा। जहां भारत है, वहीं भारत का मुसलमान है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दूसरे धड़े के प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी ने भी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी। यह मुलाकात संघ के अखिल भारतीय सहसंपर्क प्रमुख रामलाल के प्रयासों से हुई थी।

 


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