जिसकी पैरवी को कोई तैयार नहीं होता उसका मुकद्दमा भी लड़ने से नहीं हिचकते थे जेठमलानी

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वर्ष 1959 में जेठमलानी ने केएम नानावती बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले से जो प्रसिद्धि पाई तो वह सिलसिला जारी रहा।



नई दिल्ली, 08 सितम्बर (हि.स.) । देश के प्रसिद्ध अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में रविवार को निधन हो गया। उनका नाम ऐसे अधिवक्ताओं में शुमार था जो किसी मामले की पैरवी को राजी हो जाते तो समझा जाता कि जीत लगभग तय है। अपने मुवक्किल के पक्ष में जिरह करने के लिए उन्होंने करोड़ो रुपये तक की फीस ली थी, इतना ही नहीं उन्होंने कई ऐसे मुकद्दमें लड़े जिनकी वजह से उनकी प्रसिद्धि बढ़ती गई तो कई ऐसे भी लोगों के मामले को हाथ में लिया जिनकी पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता राजी नहीं था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के आरोपित रहे सतवंत सिंह और केहर सिंह का मुकद्दमा लड़ने के लिए कोई अधिवक्ता जब आगे नहीं आया तो जेठमलानी उनके साथ खड़े हो न्यायालय में पैरवी की। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषी मुरुगन की भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की। ऐसे तमाम मामले हैं जिनकी पैरवी को लेकर उनकी वाहवाही हुई तो कई बार लोगों ने उन पर सवाल भी उठाए।

वर्ष 1959 में जेठमलानी ने केएम नानावती बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले से जो प्रसिद्धि पाई तो वह सिलसिला जारी रहा। इस मामले को जेठमलानी ने यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ के साथ केस लड़ा था जो आगे चलकर मुख्य न्यायाधीश भी बने।

इंदिरा व राजीव गांधी की हत्या के आरोपियों की पैरवी के अलावा जेठमलानी ने 2001 में संसद भवन पर हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु का मुकदमा भी लड़ा था। उन्होंने अफजल के पक्ष में पैरवी करते हुए फांसी की सजा बदलने की मांग की थी और सरकार पर आरोप लगाया था कि अफजल को उसकी पसंद का वकील नहीं दिया गया और न ठीक ढ़ंग से मुकद्दमा चलाया गया।

जेठमलानी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की भी हवाला डायरी कांड में पैरवी की थी। उन्होंने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में मौजूदा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तरफ से न्यायालय में बहस की। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जे. जयललिता, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की पुत्री और सांसद कनिमोझी, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालूप्रसाद के पक्ष में भी जेठमलानी ने न्यायालय में पैरवी की।

दिल्ली के मुख्यमंत्री पर जब वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने मानहानि का मुकदमा दायर किया तो जेठमलानी केजरीवाल के पक्ष में न्यायालय में पेश हुए। इतना ही नहीं पैरवी के दौरान उनकी और जेटली की तल्ख बहस भी हुई। हालांकि बाद में फीस को लेकर जेठमलानी और केजरीवाल के बीच विवाद भी पनपा।

जेठमलानी ने जब मुंबई के मशहूर डॉन हाजी मस्तान के स्मगलिंग से जुड़े कई मुकदमों की पैरवी की तो उनको स्मगलरों का वकील भी कहा जाने लगा। उन्होंने शेयर बाजार के दलाल हर्षद मेहता और केतन पारेख का भी बचाव किया। वह जेसिका लाल हत्याकांड मामले में मनु शर्मा की ओर से न्यायालय में पेश हुए थे। इतना ही नहीं एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में वह आसाराम बापू के भी वकील रहे।

 


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