सांसद-विधायक कर सकेंगे अन्य व्यवसाय, सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार

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बीते 25 सितम्बर,2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सांसदों और विधायकों को वकालत पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि ये लोग पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। इन्हें प्रैक्टिस से रोकने का नियम बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नहीं बनाया है।



नई दिल्ली, 06 सितम्बर (हि.स.)। सांसदों और विधायकों को वकील के रूप में प्रैक्टिस करने या कोई भी बिजनेस करने से रोकने की मांग करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हम उन्हें क्यों रोकें। वे व्यापार क्यों नहीं कर सकते हैं। आपकी याचिका खारिज की जाती है। याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी।

बीते 25 सितम्बर,2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सांसदों और विधायकों को वकालत पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि ये लोग पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। इन्हें प्रैक्टिस से रोकने का नियम बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नहीं बनाया है।

केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि सांसद और विधायक सरकारी कर्मचारी नहीं होते हैं। सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वर्तमान नियमों के मुताबिक सांसदों और विधायकों को वकालत करने पर रोक नहीं है।

 


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