‘यूएपीए’ को असंवैधानिक घोषित करने की मांग संबंधी याचिका पर केन्द्र को नोटिस

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याचिका एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) नामक एनजीओ ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि किसी व्यक्ति का पक्ष सुने बिना उसे आतंकवादी घोषित करना व्यक्ति की प्रतिष्ठा और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है।



नई दिल्ली, 06 सितम्बर (हि.स.)। गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम संशोधन कानून (यूएपीए) 2019 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कानून में इस संशोधन से सरकार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिल गया है। जबकि इससे पहले सिर्फ संगठनों को ही आतंकी घोषित किया जा सकता था।

याचिका एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) नामक एनजीओ ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि किसी व्यक्ति का पक्ष सुने बिना उसे आतंकवादी घोषित करना व्यक्ति की प्रतिष्ठा और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है। याचिका में कहा गया है कि संशोधित कानून की धारा-35 में इस बात का उल्लेख नहीं है कि कब किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि महज एफआईआर दर्ज हो जाने या आतंकवाद से संबंधित मामले में दोषी ठहराए जाने पर व्यक्ति को आतंकी घोषित कैसे किया जा सकता है। केवल सरकार की राय के आधार पर किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करना मनमाना है। याचिका में मांग की गई है कि इस संशोधित कानून की धारा-35 और 36 को असंवैधानिक घोषित करार दिया जाए क्योंकि उनसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।

नए संशोधित कानून के तहत किसी व्यक्ति विशेष को भी आतंकी घोषित किया जा सकता है और उसकी संपत्ति जब्त की जा सकती है। इसमें एनआईए के महानिदेशक को आतंकी घोषित व्यक्ति की संपत्ति को जब्त करने की शक्ति दी गई है।

 


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