रेलवे ने की डीजल लागत पर सालाना 42 करोड़ रुपये की बचत

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बिजली की आपूर्ति करने के लिए प्रत्येक रेलगाड़ी में दो डीजल जरनेटर बोगी लगी होती हैं। इसे ‘एंड ऑन जरनेशन’ (ईओजी) प्रौद्योगिकी कहा जाता है।



नई दिल्ली, 03 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर रेलवे ने शताब्दी, राजधानी और हमसफर सहित 14  जोड़ी रेलगाड़ियों को ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) प्रौद्योगिकी से चलाकर डीजल की खपत में लगने वाले लगभग 42 करोड़ रुपये सालाना की बचत की है। रेलवे की योजना भविष्य में 11 जोड़ी और रेलगाड़ियों को इस सुविधा से संचालित करने की है।

आमतौर पर रेलगाड़ियों में वातानुकूलन, बिजली, पंखे, चार्जिंग प्वाइंट्स और रसोई यान में लगने वाली बिजली जिसे सामूहिक रूप से “होटल लोड” कहा जाता है। इसके लिए बिजली की आपूर्ति करने के लिए प्रत्येक रेलगाड़ी में दो डीजल जरनेटर बोगी लगी होती हैं। इसे ‘एंड ऑन जरनेशन’ (ईओजी) प्रौद्योगिकी कहा जाता है। रेलवे ने अब दुनियाभर में हरित प्रौद्योगिकी के रूप में प्रचलित ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) प्रौद्योगिकी को अपनाया है। इसमें रेलगाड़ियों के ऊपर से जाने वाली बिजली के तारों से ही डिब्बों में विद्युत आपूर्ति की जाती है।

इस प्रणाली में रेलगाड़ी के होटल लोड के लिए पावर कार की बजाय बिजली की आपूर्ति विद्युत लोकोमोटिव से की जाती है। इंजन के पेन्टोग्राफ से विद्युत करंट को टैप करके पहले ट्रांसफार्मर को भेजा जाता है और फिर डिब्बों की विद्युत आवश्यकताओं के लिए 750 वोल्ट, 3-फेज 50 हर्ट्ज में परिवर्तित किया जाता है।

यह प्रणाली पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और परिचालन में लाभदायक है। उपकरणों की विफलता के कारण रेल परिचालन के दौरान होने वाली गड़बड़ियों को कम करने की दिशा में यह भरोसेमंद है। पावर कार के स्थान पर यात्री डिब्बों को लगाकर रेलवे अतिरिक्त राजस्व भी अर्जित कर सकती है। बिजली के उत्पादन के लिए डीजल का कोई उपयोग नहीं है, अत: जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाले वायु प्रदूषण की संभावना भी समाप्त हो जाती है। साथ ही पावर कार से होने वाला तेज ध्वनि प्रदूषण भी रोकने में मदद मिली है। ऐसे पर्यावरण अनुकूल उपायों को अपनाकर भारतीय रेलवे, जोकि परिवहन का एक हरित माध्यम है, अपने कार्बन फूटप्रिंट को कम करके “कार्बन क्रेडिट” अर्जित कर रही है।

उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि उत्तर रेलवे ने 14 जोड़ी प्रीमियम और मेल व एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को “हेड ऑन जनरेशन” प्रणाली के सफलतापूर्वक इस्तेमाल से एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। मौजूदा समय में इस प्रणाली से 6 जोड़ी शताब्दी, 4 जोड़ी राजधानी, 12235/36 आनंद विहार टर्मिनल-मधुपुर जंक्शन हमसफर एक्सप्रेस, 22401 दिल्ली सराय रोहिल्ला उधमपुर वातानुकूलित एक्सप्रेस और प्रतिष्ठित 12280/79 ताज एक्सप्रेस तथा 12497/98 शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस रेलगाड़ियां चलाई जा रही हैं। इसके चलते डीजल की खपत में लगने वाले लगभग 42 करोड़ रुपये सालाना की बचत हुई है। निकट भविष्य में “हेड ऑन जनरेशन” प्रणाली से और 11 जोड़ी रेलगाड़ियां, जिनमें 2 शताब्दी एक्सप्रेस, 2 दुरन्तो और 7 मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को चलाये जाने की योजना है।

 


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