सरकारी की गलत नीतियों और आर्थिक कुप्रबंधन की देन है आर्थिक मंदी : डॉ. मनमोहन सिंह

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सिंह ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ने की  पूरी क्षमता है, किंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के गलत नीतियों और आर्थिक कुप्रबंधन के कारण देश को मंदी का सामना करना पड़ रहा है।



नई दिल्ली, 01 सितम्बर (हि.स.)। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट को लेकर केंद्र सरकार  और उसकी नीतियों की तीखी आलोचना करते हुए जोरदार हमला बोला है। सिंह ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ने की  पूरी क्षमता है, किंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के गलत नीतियों और आर्थिक कुप्रबंधन के कारण देश को मंदी का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने यहां रविवार को कहा कि देश में मंदी का माहौल आर्थिक कुप्रबंधन की देन है। डॉ सिंह ने रविवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि देश की आर्थिक मंदी कुप्रबंधन की शिकार हुई है। उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि उसे किसी तरह की राजनीति किए बिना देश को आर्थिक मंदी से बाहर निकालने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह प्रयास जल्द से जल्द करना चाहिए, क्योंकि देश ज्यादा समय तक आर्थिक मंदी के दौर से नहीं गुजर सकता।

उन्होंने यहां एक बयान में कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में विकास दर 0.6 प्रतिशत रह गई है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर 15 माह के निचले स्तर पर है और खपत दर 18 माह के निचले स्तर पर है। निवेश ठप है और कारोबार व  कारोबारी टैक्स की मार झेल रहे हैं। उन्होंने मौजूदा हालात का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि ऑटो मोबाइल क्षेत्र में पिछले कुछ माह के दौरान साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों की छंटनी हुई है और वे बेरोजगार हो गए हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हालत भी खस्ताहाल है और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी की बजाय कमी आई है जो कि अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए ठीक नहीं है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था में आई इस गिरावट के कारणों का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी बड़ी वजह नोटबंदी का निर्णय और  जल्दबाजी में बिना पूरी तैयारी के वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को लागू किया जाना है। उन्होंने हाल ही में सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से उसकी रिजर्व मद से 1.76 लाख करोड़ रुपये निकाले जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल किस तरह और कहां किया जाए, सरकार के पास इसकी कोई योजना नहीं है।

 


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