नई दिल्ली/मुंबई, 24 अगस्त (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बंद हो चुकी निजी क्षेत्र की एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के बारे में एक बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने कहा कि उन्होंने कर चुकाने से बचने के लिए साजिशें रचीं और घोटाले कर पैसा विदेश भेजा।
ईडी ने शुक्रवार को जेट के पूर्व प्रमोटर नरेश गोयल और उनकी कंपनियों और साझेदार एजेंसियों के दिल्ली और मुंबई स्थित 12 ठिकानों पर तलाशी ली थी, जिसमें जेट अधिकारियों के कैंपस भी शामिल थे। ईडी ने विदेशी विनिमय कानून (फेमा) के कथित उल्लंघन के आरोप के आधार पर ये तलाशियां लीं।
प्रवर्तन निदेशालय ने एक बयान में कहा कि गोयल और उनके लंबे समय से सहयोगी रहे एक शख्स गार्दी के घरों पर तलाशी में कई संदिग्ध दस्तावेज तथा डिजिटल सबूत जब्त किए गए। ईडी ने कहा कि प्राथमिक जांच से इस बात के संकेत मिलते हैं कि अपनी घरेलू और विदेशी कंपनियों के जरिए गोयल ने कर से बच निकलने के लिए कई योजनाएं तैयार की थी।
ईडी ने बताया कि इस साल मार्च में जेट एयरलाइन के अध्यक्ष का पद छोड़ने वाले गोयल की 19 निजी कंपनियां है, जिसमें से 14 भारत में और 5 विदेश में पंजीकृत है। इन संदिग्ध कंपनियों के जरिए भारी मात्रा में धन विदेश भेजा गया। जांच एजेंसी ने कहा कि नरेश गोयल कई विदेशी कंपनियों को परोक्ष तौर पर नियंत्रित करते हैं, जिनमें से कुछ कंपनियां कर की चोरी की पनाहगाह विदेशी स्थानों पर पंजीकृत है।
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि इनमें से कुछ कंपनियों को विमानन पट्टा अनुबंध, विमान रख-रखाव अनुबंध और कुछ अन्य मदों के नाम पर संदेहास्पद तरीके से और बढ़ा-चढ़ा कर भुगतान किए गए। इतना ही नहीं समूह की ही दुबई स्थित एक कंपनी को कमीशन के रूप में बढ़ा-चढ़ाकर भारी मात्रा में भुगतान किया गया। वह कंपनी जेट एयरवेज की विशेष विदेशी बिक्री एजेंट का काम करती थी।
