विपक्ष ने दिया जंतर मंतर पर धरना, जम्मू-कश्मीर के नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग

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तृणमूल, वामदल, द्रमुक और समाजवादी पार्टियों के नेताओं ने धरने में भाग लेते हुए एक प्रस्ताव के तहत हिरासत में लिए गए सभी विपक्षी नेताओं की रिहाई की मांग की है।



नई दिल्ली, 22 अगस्त (हि.स.)। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने गुरुवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी बनाकर वहां के नेताओं को हिरासत में लिए जाने के सरकार के फैसले का विरोध करते हुए राज्य में सामन्य स्थिति बहाल करने की मांग की। तृणमूल, वामदल, द्रमुक और समाजवादी पार्टियों के नेताओं ने धरने में भाग लेते हुए एक प्रस्ताव के तहत हिरासत में लिए गए सभी विपक्षी नेताओं की रिहाई की मांग की है।

जंतर मंतर पर हुए इस धरने में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, मार्कसवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव डी राजा, समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव, लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद याजव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज झा, द्रमुक नेता टीआर बालु और तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश त्रिवेदी ने भाग लिया। धरने में हाल ही में गिरफ्तार हुए पूर्व केन्द्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने भी भाग लिया।

धरने में सभी दलों ने मिलकर एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि जम्मू-कश्मीर में संचार सुविधाओं को बंद किया जाना, अनुच्छेद 370 को हटाया जाना और वहां के राजनीतिक दलों, नागरिक समाज के नेताओं को हिरासत में लिया जाना एक तरह से अघोषित आपातकाल है। मुश्किल की इस घड़ी में विपक्ष जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ खड़ा है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि यह फ्री स्टीच को रोकना और एकत्र होने के अधिकार को छीनना संविधान में दिए गए मौलिक अधिकरों का हनन है। सरकार को चाहिए कि वह तुरंत राज्य में समान्य स्थिति बहाल करते हुए संचार व्यवस्था ठीक करे और नेताओं की रिहाई सुनिश्चित करे।

 


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