हाई कोर्ट:युवक-युवतियों की शादी की उम्र एक समान करने की मांग पर केंद्र सरकार को नोटिस

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याचिका में कहा गया है कि युवतियों की शादी की उम्र 18 वर्ष करना भेदभाव के बराबर है। याचिका में कहा गया है कि युवक और युवतियों के दिन शादी की न्यूनतम आयु में फर्क करना हमारे पितृसत्तात्मक समाज की मानसिकता को दर्शाता है।



नई दिल्ली, 19 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने युवक और युवतियों की शादी की एक समान उम्र करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को केंद्र सरकार, केंद्रीय विधि मंत्रालय औऱ महिला और बाल विकास मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 30 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि युवतियों की शादी की उम्र 18 वर्ष करना भेदभाव के बराबर है। याचिका में कहा गया है कि युवक और युवतियों के दिन शादी की न्यूनतम आयु में फर्क करना हमारे पितृसत्तात्मक समाज की मानसिकता को दर्शाता है। इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह नहीं है। यह प्रावधान युवतियों के साथ भेदभावपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि पुरुषों की शादी करने की उम्र 21 वर्ष है, जबकि महिलाओं की शादी करने की उम्र 18 वर्ष है। यह प्रावधान लैंगिक समानता और लैंगिक न्याय के साथ साथ महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है।

याचिका में कहा गया है यह एक सामाजिक सच्चाई है कि शादी के बाद महिला को अपने पति से कम आंका जाता है और उसमें उम्र का अंतर और भेदभाव बढ़ाता है। पत्नी से उम्मीद की जाती है कि वह अपने से बड़े उम्र के पति का सम्मान करें। याचिका में युवक और युवती दोनों की शादी करने की न्यूनतम उम्र एक समान 21 वर्ष करने की मांग की गई है।

 


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