बिहार की लाइफ लाइन सिमरिया पुल पर कभी भी ठप हो सकता है यातायात

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16 टन से अधिक वजन के वाहनों का परिचालन रोके जाने के बावजूद भारी वाहनों का परिचालन जारी रहने से पुल के सड़क मार्ग में बड़ा गड्ढ़ा और दरार आ गया है।



बेगूसराय, 16 अगस्त (हि.स.)। पूर्वोत्तर के राज्यों को देश के अन्य भाग से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर आजादी के बाद बने सबसे पहले पुल राजेंद्र सेतु (सिमरिया पुल) पर कभी भी सड़क यातायात ठप हो सकता है। 16 टन से अधिक वजन के वाहनों का परिचालन रोके जाने के बावजूद भारी वाहनों का परिचालन जारी रहने से पुल के सड़क मार्ग में बड़ा गड्ढ़ा और दरार आ गया है। हाथिदह छोर की ओर से बने खाई और दरार को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया तो सड़क यातायात ठप होने के साथ रेल परिचालन भी प्रभावित हो सकता है।
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह के प्रयास से बने इस पुल के दोनों फुटपाथ की हालत काफी जर्जर है तथा वह टूट कर नीचे गिर चुका है, जिसे घेरकर काम चलाया जा रहा है। वहीं, छोटे वाहनों के परिचालन से भी पुल धड़क रहा है, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
बता दें कि 1959 में पुल का उद्घाटन किया गया था, जिसके बाद बीच-बीच में मरम्मत कर परिचालन जारी रहा। 2009 में गार्टर में दरार आ गई, जिसका 2012 तक मरम्मत नहीं होने के बाद बेगूसराय के सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी जुटाई और अधिवक्ता गोपाल कुमार के सहयोग से पटना उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर किया था।
हाई कोर्ट की कड़ाई और तत्कालीन सांसद डॉ भोला सिंह द्वारा संसद में मामला उठाये जाने पर करीब 20 करोड़ खर्च कर मरम्मत किया गया, लेकिन पटना के गांधी सेतु और भागलपुर के विक्रमशिला सेतु से भारी वाहनों के गुजरने पर पाबंदी लग जाने के बाद से ही पूरे बिहार के वाहनों का लोड राजेन्द्र सेतु पर आ गया है। इस वजह से अक्सर यहां जाम की स्थिति बनी रहती है।
पुल से जुड़े रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि राजेन्द्र सेतु पर ओवरलोडेड वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने के लिए कई बार एनएचएआई तथा पटना एवं बेगूसराय जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। एनएचएआई को पुल के दोनों किनारे वाहन वजन मापक यंत्र लगाने आदेश दिया गया, लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। बेगूसराय एवं पटना जिला प्रशासन ने भारी वाहनों का परिचालन रोकने के दोनो ओर पुलिस को लगाया है लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं है। दोनों ओर मौजूद सिपाही एवं संबंधित थाना दो सौ से पांच सौ तक रुपया लेकर धड़ल्ले से भारी वाहनों को पुल पार करवा रहे हैं, जिसके कारण बीच में दरार आ गई है।
बेगूसराय के सांसद प्रतिनिधि अमरेन्द्र कुमार अमर ने बताया कि दो वर्षों से अधिक के लंबे समय तक मरम्मत के नाम पर बंद रहने के बाद परिचालन शुरू हुआ। लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन को मेल में लेकर तथा तय मानकों को ताक पर रखकर रात्रि में ऐसे बड़े मालवाहक बड़े ट्रक का आवागमन होता है और जिस कारण पुल की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि दो जगहों पर पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। हम पुलिस के सहारे पुल की सुरक्षा नहीं छोड़ सकते। जिला प्रशासन अविलंब संज्ञान ले तथा रेलवे एवं एनएचआई के साथ मिलकर बैठक में इसकी सुरक्षा तथा इस पर गुजरने वाले वाहनों पर मालवाहक की क्षमता तथा अन्य बिंदुओं पर विचार कर उसे कड़ाई से लागू किया जाए।

 


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