राहुल ने कहा: बिना शर्त जम्मू-कश्मीर जाने को तैयार, मलिक बताएं कब आऊं

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राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा, ‘‘प्रिय मलिकजी, मैंने अपने ट्वीट पर आपके कमजोर जवाब को देखा। मैं आपके जम्मू-कश्मीर में बिना किसी शर्त के आने और वहां के लोगों से मिलने के न्यौते को स्वीकार करता हूं। मैं कब आ सकता हूं?’’



नई दिल्ली, 14 अगस्त (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की ओर से राहुल गांधी को दिए गए न्यौते को वापस लेने के एक दिन बाद राहुल ने कहा है कि वह बिना शर्त जम्मू-कश्मीर आने को तैयार हैं।

राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा, ‘‘प्रिय मलिकजी, मैंने अपने ट्वीट पर आपके कमजोर जवाब को देखा। मैं आपके जम्मू-कश्मीर में बिना किसी शर्त के आने और वहां के लोगों से मिलने के न्यौते को स्वीकार करता हूं। मैं कब आ सकता हूं?’’

एक समाचार पत्र को दिए गए साक्षात्कार में राज्यपाल मलिक ने कहा था कि राहुल गांधी अपने आऩे को लेकर कुछ शर्तें लगा रहे हैं। वह प्रतिनिधिमंडल के साथ आ रहे हैं, वह नजरबंद नेताओं से मिलना चाहते हैं। यह संभव नहीं है। उनको शर्तों के साथ न्योता नहीं दिया था। ऐसे में वह अपना न्योता वापस लेते हैं।

मलिक ने कहा कि राहुल गांधी पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित ऐजेंटे की भाषा बोल रहे हैं और इसे देखते हुए उन्होंने राहुल को जम्मू-कश्मीर आने का न्योता दिया था। लेकिन उनके शर्तें लगाने के चलते वह अपना न्योता वापस लेते हैं। इससे पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा था,  ‘‘प्रिय राज्यपाल मलिक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की यात्रा के लिए विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल और मैं आपके विनम्र निमंत्रण को स्वीकार करते हैं। हमें एक विमान की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कृपया हमें वहां पर लोगों, मुख्यधारा के नेताओं और तैनात सैनिकों से मुलाकात करने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें।’’

इससे पहले राहुल अपने बयान में कहते रहे हैं कि एकतरफा रूप से जम्मू और कश्मीर को तोड़कर, चुने हुए प्रतिनिधियों को कैद करके और संविधान का उल्लंघन करके राष्ट्रीय एकीकरण के एजेंडे को नहीं बढ़ाया जा सकता। यह राष्ट्र अपने नागरिकों से बना है न कि भूमि के भूखंडों से। शक्ति के इस दुरुपयोग से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव हो सकते हैं। कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं को गुप्त स्थानों पर जेल में डाल दिया गया है। यह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। राहुल ने कहा था कि सरकार के कदम से आतंकियों को राज्य के लोकतांत्रिक नेताओं के स्थान पर रिक्त हो चुके नेतृत्व को भरने का मौका मिलेगा। कैद किए गए नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर से अशांति की खबरें आ रही हैं। मीडिया और संचार को ब्लैक आउट कर दिया गया है। वह सरकार से आग्रह करते हैं कि जम्मू-कश्मीर में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ब्लैकआउट से पर्दा उठाने के लिए तत्काल कदम उठाए।

 


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