धरती की कक्षा छोड़कर चंद्रमा की कक्षा की ओर बढ़ा चंद्रयान-2

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चंद्रयान-2′ 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा और इसे चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए फिर से लिक्विड इंजन का उपयोग किया जाएगा। ​बेंगलुरु के इसरो मिशन ऑपरेशन्स काम्प्लेक्स से इस अभियान पर निगरानी रखी जा रही है।



नेल्लोरे (आंध्र प्रदेश),14 अगस्त (ह‍ि.स.)। पृथ्वी के चार चक्कर लगाने के बाद ‘चंद्रयान-2′ पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा की ओर बढ़ने लगा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के दो बजकर 21 मिनट पर चंद्रयान-2 को चंद्रपथ पर डालने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया में कामयाबी पायी। इसके तुरंत बाद चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक ‘लूनर ट्रांसफर ट्राजेक्टरी’ में प्रवेश कर गया।
इसरो ने अपने ट्वीट में कहा है क‍ि पृथ्वी की अंतिम कक्षा छोड़ने के दौरान यान के इंजन को 1203 सेकंड के लिए चालू किया गया था। इसके साथ ही चंद्रयान-2 लूनर ट्रांसफर ट्राजेक्टरी में प्रवेश कर गया।’ ‘अब तक ‘चंद्रयान-2′ को पृथ्वी की कक्षा में ऊपर उठाने की पांच प्रक्रिया चरणों को​ सफलतापूर्वक ​अंजाम दे चुका है​ और ​अब तक चंद्रयान-2 की सभी प्रणालियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं।’ चंद्रयान-2′ 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचेगा और इसे चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए फिर से लिक्विड इंजन का उपयोग किया जाएगा। ​बेंगलुरु के इसरो मिशन ऑपरेशन्स काम्प्लेक्स से इस अभियान पर निगरानी रखी जा रही है।
चंद्रयान-2 तय तारीख को चांद पर पहुंचेगा
चंद्रयान-2 पृथ्वी की कक्षा में 23 दिन रहा और उसके चार चक्कर लगाए। इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 22 जुलाई को यह मिशन लॉन्च किया था। चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने में 6 दिन लगेंगे। 20 अगस्त को चंद्रयान-2, चंद्रमा की कक्षा में पहुंच जाएगा। पृथ्वी से चंद्रमा के बीच की दूरी 3.84 लाख किलोमीटर है। मिशन की लॉन्चिंग की तारीख आगे बढ़ाने के बावजूद चंद्रयान-2 चांद पर तय तारीख यानी 7 सितंबर को ही पहुंचेगा। इसे समय पर पहुंचाने का मकसद यही है कि लैंडर और रोवर तय शेड्यूल के हिसाब से काम कर सकें। समय बचाने के लिए चंद्रयान ने पृथ्वी का एक चक्कर कम लगाया। पहले 5 चक्कर लगाने थे, पर बाद में इसे चार किया गया। इसकी लैंडिंग ऐसी जगह तय है, जहां सूरज की रोशनी ज्यादा है। रोशनी 21 सितंबर के बाद कम होनी शुरू होगी। लैंडर-रोवर को 15 दिन काम करना है, इसलिए समय पर पहुंचना जरूरी है।

 


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