मुंबई, 26 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता छगन भुजबल की शिवसेना में संभावित वापसी का कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया है। शुक्रवार को मुंबई में कई ठिकानों पर भुजबल के विरोध में शिवसैनिकों ने पोस्टर लगाया है। इन बैनरों में भुजबल को शिवसेना में वापस लिए जाने का विरोध किया गया है।
जानकारी के अनुसार, रविंद्र तिवारी नामक शिवसैनिक ने बैनर पर लिखा- जिसने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को तकलीफ दी, वह लखोबा लोखंडे अर्थात् छगन भुजबल शिवसेना में नहीं चाहिए।
बीते दिन गुरुवार को राकांपा नेता सचिन अहिर शिवसेना में शामिल हो गए। सचिन अहिर के साथ ही राकांपा नेता छगन भुजबल के भी शिवसेना में शामिल होने की चर्चा हो रही है। छगन भुजबल के शिवसेना में आने को लेकर शिवसैनिक नाराज हैं। इस बीच शिवसैनिकों ने मुंबई में कई जगह पोस्टर लगाकर अपनी नाराजगी जताई और छगन भुजबल का पार्टी में आने का विरोध किया।
जानकारी के अनुसार छगन भुजबल 1991 में शिवसेना छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उस समय छगन भुजबल विधानसभा में विपक्षी नेता थे, तभी शिवसेना प्रमुख ने छगन भुजबल को लखोबा लोखंडे कह कर संबोधित किया था। शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की थी। तब छगन भुजबल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। छगन भुजबल शरद पवार के नजदीकी और राकांपा के संस्थापक नेताओं में से एक हैं। बतौर गृहमंत्री छगन भुजबल ने बालासाहेब ठाकरे को गिरफ्तार कराया था, इसलिए शिवसैनिक आज भी छगन भुजबल को निजी दुश्मन मानते हैं। इसी वजह से शिवसेना में छगन भुजबल की शिवसेना में संभावित वापसी का जोरदार विरोध किया जा रहा है।
हालांकि छगन भुजबल ने शिवसेना में वापस जाने की खबरों का खंडन किया है। छगन भुजबल ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर राकांपा नहीं छोड़ने वाले। भ्रम फैलाने के लिए इस तरह की खबरें प्रसारित की जा रही हैं,इन खबरों में कोई भी तथ्य नहीं है।
