गाजियाबाद, 24 जुलाई (हि.स.)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिंडन नदी के किनारे पर स्थित आला हजरत हाउस की सील खोलने के आदेश दिए हैं। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) न होने के चलते इसे सील किया गया था। अब एसटीपी का निर्माण पूरा होने के बाद एनजीटी कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद आला हजरत हज हाउस खोलने का आदेश दिया है। एनजीटी ने यह भी कहा है कि इस बीच तीन सप्ताह के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें संयुक्त रूप से निरीक्षण करके सशर्त एनओसी जारी करेंगी। सपा सरकार में इसका उदघाट्न छह दिसंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था।
एनजीटी के आदेश के बाद वर्ष 2018 में जिला प्रशासन ने हज हाउस को एसटीपी न होने के चलते सील कर दिया था। इस मामले में कुछ पर्यावरणविदों ने एनजीटी में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने यह पक्ष रखा था कि हज हाउस में करीब दो हजार यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है, लेकिन वहां एसटीपी नहीं बनाया गया। इस मामले में मुम्बई हज कमेटी की ओर से एसटीपी निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये जारी किए गए थे, जिसके बाद यूपी जल निगम के कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीडीएस) ने 136 केएलडी क्षमता का एसटीपी का निर्माण किया था।
इस मामले में यूपी हज कमेटी के अधिवक्ता रोहित पांडेय ने बताया कि एनजीटी कोर्ट ने पूरे मामले को सुनने और एसटीपी निर्माण के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट देखने के बाद इसे खोलने के आदेश दिए हैं। रोहित ने बताया कि कोर्ट ने अपने फैसले में तीन सप्ताह में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एसटीपी के संचालन और रखरखाव की रिपोर्ट एनओसी के रूप में कोर्ट में दाखिल करने को भी कहा है।
