लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए बैलेट जरूरी : मुख्यमंत्री

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आज ऐतिहासिक 21 जुलाई का शहीद दिवस है। 26 साल पहले इस दिन 13 युवा पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। उसके बाद से हर साल हम लोग इस दिन को शहीद दिवस के तौर पर मनाते हैं। मैं वाममोर्चा के 34 सालों के शासन के दौरान मारे गए सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दे रही हूं।’



कोलकाता, 21 जुलाई (हि.स.)। शहीद दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश में मतदान प्रक्रिया के लिए ईवीएम की जगह बैलेट इस्तेमाल करने की मांग की है। रविवार सुबह ममता ने इस बारे में ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि ‘आज ऐतिहासिक 21 जुलाई का शहीद दिवस है। 26 साल पहले इस दिन 13 युवा पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। उसके बाद से हर साल हम लोग इस दिन को शहीद दिवस के तौर पर मनाते हैं। मैं वाममोर्चा के 34 सालों के शासन के दौरान मारे गए सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दे रही हूं।’
दूसरे ट्वीट में मुख्यमंत्री ने लिखा कि 1993 में 21 जुलाई को जो मुख्य आंदोलन हुआ था। वह था,, ‘मतदाता पहचान पत्र नहीं तो वोट नहीं’। इस बार इस दिवस पर हमारी मांग है कि लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए ईवीएम हटाकर बैलेट का इस्तेमाल शुरू किया जाना चाहिए। आइए हम सब मिलकर प्रतिज्ञा करें कि देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए ईवीएम की जगह बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मुहिम को बल देंगे।
उल्लेखनीय है कि 1993 में प्रदेश कांग्रेस की युवा इकाई के अध्यक्ष रहने के दौरान ममता बनर्जी ने ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए मतदाता पहचान पत्र बनाने की मांग पर राइटर्स बिल्डिंग में स्थित राज्य सचिवालय के घेराव का आह्वान किया था। उस समय ज्योति बसु मुख्यमंत्री थे। ममता के नेतृत्व में हजारों की भीड़ सचिवालय की ओर बढ़ रही थी, जिसे बलपूर्वक रोकने में पुलिस जुटी थी। इसके बाद सचिवालय की ओर बढ़ रही भीड़ पर पुलिस ने फायरिंग कर दी थी, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी जबकि हजारों लोग घायल हुए थे। उसके बाद से लेकर आज तक हर साल मुख्यमंत्री मारे गए लोगों की याद में शहीद दिवस मनाती रहती हैं। हालांकि विगत आठ साल से वह सत्ता में हैं और 1993 के शहीदों को आज तक न्याय नहीं मिला है। फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों अथवा फायरिंग का आदेश देने वाले अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

 


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