चांद तारा के निशान वाले हरे रंग के झंडे पर दो हफ्ते में जवाब दे केन्द्र

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रिजवी का कहना है कि ये झंडा पाकिस्तान और मुस्लिम लीग से मिलता-जुलता है। मुस्लिम इलाकों में इसे फहराया जाना गलतफहमी और सांप्रदायिक तनाव की वजह बनता है।



नई दिल्ली, 19 जुलाई (हि.स.)। चांद तारा के निशान वाले हरे रंग के झंडे पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। आज सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की।
याचिका यूपी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने दायर की है। रिजवी का कहना है कि ये झंडा पाकिस्तान और मुस्लिम लीग से मिलता-जुलता है। मुस्लिम इलाकों में इसे फहराया जाना गलतफहमी और सांप्रदायिक तनाव की वजह बनता है। अपनी याचिका में रिजवी ने कहा है कि देशभर में इस तरह के झंडे को फहराने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
याचिका में कहा गया है कि इस झंडे का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। याचिका में झंडों का इतिहास बताते हुए कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद ने अपने कारवां में सफेद या काले रंग के झंडों का इस्तेमाल करते थे। रिजवी ने कहा है कि इस चांद सितारे के हरे झंडे का ईजाद 1906 में नवाब बकर उल मलिक और मुहम्मद अली जिन्ना ने की थी।

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